Ganesh Chaturthi: बहुत जल्द गणेश चतुर्थी आने वाली है। इस अवसर भक्त श्रद्धालु अपने घरों में गजानन गणपति की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इस प्रतिमा की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है औऱ अंत में उसे किसी पवित्र सरोवर, नदी या समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार गणेश प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी कुछ नियम बताए गए हैं। जानिए इन नियमों के बारे में
शास्त्रों में कहा गया है कि यदि प्रतिमा को पूजा के बाद विसर्जित करना हो तो उसे मिट्टी से बनाना चाहिए। ऐसा करने पर विसर्जित की गई प्रतिमा पानी में घुल जाती है। किसी अन्य पदार्थ से प्रतिमा बनाने पर वह प्रतिमा पानी में नहीं घुल पाती और जाने-अनजाने पैरों में या गंदगी में आकर उसका अपमान होता है।
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यदि आप अपने घर पर स्थाई रूप से गणपति प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं तो इसके लिए पत्थर की प्रतिमा बनवानी चाहिए। किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए आप सोने, चांदी, अष्टधातु, नीम, आम अथवा अन्य किसी वस्तु से भी मूर्ति बनवा सकते हैं।
प्रतिमा को बनाकर किसी अच्छे सिद्ध मुहूर्त में घर पर लाकर स्थापित करवाना चाहिए। उस प्रतिमा की किसी योग्य विद्वान पंडित द्वारा प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद पूजा-पाठ आदि किए जाते हैं। इस प्रकार वह प्रतिमा सिद्ध प्रतिमा बन जाती है और भक्तों की समस्त इच्छाएं पूर्ण करने लगती हैं।
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डिस्क्लेमर:यहां दी गई जानकारी ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं तथा शास्त्रों से ली गई है एवं पाठकों की सूचना मात्र के लिए दी जा रही है। Morning News India इसकी पुष्टि नहीं करता है। यहां दिए गए उपायों अथवा सुझावों को आजमाने से पहले किसी एक्सपर्ट की राय अवश्य लें।
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