Vrindavan Sant Lal Baba: भगवान कृष्ण और राधारानी की भूमि वृंदावन का शास्त्रों में अलग ही महात्म्य बताया गया है। आज भी वृंदावन की भूमि ईश्वरीय ऊर्जा से परिपूर्ण होने के कारण यहां पर बड़े-बड़े संत-महात्मा रहते हैं। यमुना नदी के किनारे रहने वाले 91-वर्षीय लाल बाबा भी ऐसे ही एक तपस्वी संत हैं। उनकी ख्याति सुनकर बहुत से भक्तगण उनके दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने भी आते हैं।
लाल बाबा अपने गुरु के साथ काफी लंबे समय से वृंदावन में ही रह रहे हैं। वह नित्य प्रति अपने गुरु की सेवा करते हैं। वह 40 वर्षों से भी अधिक समय से रोजाना सुबह जल्दी उठकर वृंदावन की परिक्रमा कर रहे हैं। लगभग 12 किलोमीटर की इस परिक्रमा को लाल बाबा दौड़ कर मात्र 35 मिनट में ही पूरा कर लेते हैं, दौड़ते समय उनके हाथ में एक त्रिशूल और धूपबत्ती भी होती है जो पूरे परिक्रमा मार्ग को सुगंध से भर देती है।
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वृंदावन की परिक्रमा करते हुए लाल बाबा मार्ग में आने वाले सभी मंदिरों को भी शीश नवाते हैं। परिक्रमा मार्ग में स्थित चामुंडा देवी मंदिर में वह पूजा भी करते हैं। वह रोजाना सुबह लगभग 5.30 बजे चामुंडा देवी मंदिर में पहुंच जाते हैं। विशेष उनके लिए ही यहां पर अगले दस मिनट तक सभी भक्त भी अपना स्थान छोड़ देते हैं। पूजा के बाद बाबा परिक्रमा में आगे बढ़ जाते हैं।
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वृंदावन में रहने वाले लोगों ने बताया कि बाबा ने 20 वर्ष पहले अन्न और नींद का त्याग कर दिया था। दिन भर वह सेवा और भक्ति में ही लगे रहते हैं। वह अपने दिन की तैयारी रात्रि 12 बजे से ही आरंभ कर देते हैं। अपने हाथों से फूल और माला तैयार करते हैं। इसके बाद स्नान-ध्यान आदि कर परिक्रमा के लिए निकलते हैं।
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