जयपुर। Mother Day 2024 पर Ola के भाविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) ने महिलाओं को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने ट्वीट किया है कि उनकी कंपनी अभी तक 5000 महिलाओं सशक्त बना चुकी है जिसके तहत उन्होंने लिखा कि एक भारतीय संस्थान के रूप में ओला महिलाओं के लिए सबसे बड़े ऑटोमोटिव संयंत्रों में से एक चलाती है। उन्होंने यह भी ऐलान किया आने वाले वर्षों में उनकी कंपनी में यह संख्या बढ़कर हजारों में हो जाएंगी। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और लिंक्डिन जैसी कंपनियों को लेकर लिखा कि ‘समलैंगिक समावेशिता के संबंध में हमें पश्चिमी कंपनियों के ज्ञान की आवश्यकता नहीं। उन्होंने यह ट्वीट लिंक्डिन द्वारा उनके सर्वनाम वाली पोस्ट को हटाने के बाद लिखा है।
भाविश अग्रवाल ने यह भी लिखा कि पिछले साल उन्होंने निजी यात्रा के तौर अयोध्या का दौरा किया था जहां यह जाना कि कैसे प्राचीन काल से हमारी संस्कृति में ट्रांसजेंडरों को विशेष सम्मान दिया गया है। उन्होंने इसको लेकर डीडी न्यूज का लघु वीडियो भी शेयर किया है। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने लिंक्डिन जैसी कंपनियों को बताया महिला शक्तिकरण के मामले में हम पहले से ही सक्षम थे और अब इस और अधिक गति से कार्य कर रहे हैं।
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भाविश ने कहा कि वो रातोरात लिंक्डइन के एकाधिकार के बारे में कुछ नहीं कर सकते। लेकिन वो डीपीआई सोशल मीडिया फ्रेमवर्क बनाने के लिए भारतीय डेवलपर समुदाय के साथ काम करने की करार करने की सोच रहे हैं। यूपीआई, ओएनडीसी, आधार आदि जैसे डीपीआई एक विशिष्ट भारतीय विचार हैं और सोशल मीडिया की दुनिया में इसकी और भी अधिक आवश्यकता है। इसके लिए सामुदायिक दिशा-निर्देश भारतीय कानून होना चाहिए।
उन्होंने लिखा कि लिंक्डइन का स्वामित्व माइक्रोसॉफ्ट के पास है और ओला एज़्योर का एक बड़ा ग्राहक है। इस वजह से उन्होंने अपना पूरा कार्यभार एज़्योर से हटाकर स्वयं के पास ले लिया है। अब उनकी टीम यह कार्य करने की चुनौती स्वीकार चुकी है। लेकिन, मेरी टीम ऐसा करने के लिए बहुत उत्साहित है। अब Azure से जो डेवलपर बाहर जाना चाहते हैं उनको ओला कंपनी पूरे एक साल तक मुफ्त क्लाउड उपयोग की अनुमति देगी जब कि वो Azure पर वापस नहीं जाते! इसके लिए डेवलपर Exitazure@olakrutrim.com पर मेल कर सकते हैं।
दरअसल, हाल ही में भाविश अग्रवाल ने X एक ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने एक स्क्रीन शॉट शेयर किया था। यहां पर लिंक्डइन के एआई बॉट से अपने खुद के बारे में पूछा गया जवाब था। इसमें उन्होंने पूछा था कि भाविश अग्रवाल कौन हैं? जिसके जवाब में चैटबॉट ने जो जवाब भेजा था, उसमें सीईओ को संबोधित करने के लिए They और Their का इस्तेमाल किया गया था। इसी को लेकर भाविश नाराज हो गए। उन्होंने लिखा कि भारत में हममें से अधिकतर लोगों को सर्वनाम के बीमारी के राजनीति के बारे में कोई अंदाजा भी नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा कि जो लोग ऐसा करते हैं वो हमारे कॉरपोरेट कल्चर का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने लिखा कि बेहतर यही है कि इस बीमारी को वापस वहीं भेज दिया जाए, जहां से यह आया है। हमारी संस्कृति में सबके लिए सम्मान है और किसी नए सर्वनाम की जरूरत नहीं है।
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