2 जून को शाम करीब 7:05 बजे कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841-अप) सहित ओडिशा के बालासोर में बाहानगा स्टेशन के पास तीन ट्रेन एक साथ दुर्घनाग्रस्त हुई। इस दौरान 288 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए। हादसे के 39 घंटे बाद असली वजह का पता चला है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ओडिशा में ट्रेन एक्सीडेंट इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ।
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ओडिशा हादसे को हुए करीब 39 घंटे बीत चुके है। 2 दिन बाद हादसे की असली वजह तक पहुंच पाए है। पहले माना जा रहा था कि यह एक्सीडेंट कवच सिस्टम की गैरमौजूदगी के कारण हुआ है लेकिन रेल मंत्री ने कवच सिस्टम की गैरमौजूदगी को हादसे का कारण नहीं माना है। उन्होनें कहा कि कवच सिस्टम का कोई लेना-देना नहीं है। यह हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ। हमने जिम्मेदारों की भी पहचान कर ली है। जल्द ही ट्रेक का काम पूरा करके ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
क्या होता है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम वह होता है, जिसमें ट्रेन का ट्रैक तय किया जाता है। सिग्नल के द्वारा लोको पायलट को अनुमति दी जाती है कि वह अपनी ट्रेन के साथ रेलवे स्टेशन के यार्ड में प्रवेश करे। पाइंट्स और सिग्नल्स के बीच में एक लाकिंग इस प्रकार से होती है कि पाइंट्स सैट होने के बाद जिस लाइन का रूट सैट हुआ हो उसी लाइन का सिगनल आए।
वहीं दूसरी ओर बालासोर हादसे की जांच का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। खबरों के मुताबिक विशाल तिवारी नाम के वकील ने इस मामले में याचिका दायर की है जिसमें दुर्घटना से बचाने वाले कवच सिस्टम को जल्द से जल्द लागू कराने की मांग की है।
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