प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता की वकालत करके देशभर में इस मुद्दे को चर्चा का विषय बना दिया। इन दिनों हर कोई नेता और राजनीतिक दल यूसीसी को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। पीएम मोदी ने इसे देश में लागू करवाने की मांग की तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसके विरोध में उतर गया। यहां तक कि बोर्ड ने एक लेटर जारी कर लोगों से इसके विरोध की अपील करना भी शुरु कर दिया।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर बुधवार को वर्चुअल मीटिंग बुलाई। इस बैठक में UCC का विरोध करने का फैसला किया। बोर्ड ने लेटर जारी कर लोगों से विरोध करने की अपील की। AIMPLB के महासचिव ने कहा कि यूसीसी पर हमने लोगों से चर्चा करके उनकी राय जानी है। जिसमें पता चला कि यूसीसी न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है।
वहीं केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शरियत कानून पर हमला बोला है। उन्होनें कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बनाने वाले खुद को भगवान मानने लग जाते है। 90% कानूनों का कुरान से कोई लेना-देना नहीं है। इस्लामी कानून भेदभाव करते हैं। कानूनों को शरियत का नाम देकर उसकी वकालत करते हैं।
इसके साथ ही खान ने कहा कि कानून तो बदला जा सकता है लेकिन लोगों की आदत बदलना मुश्किल होता है। कुछ लोग धर्म के नाम पर राजनीति करने लग जाते हैं। अगर यूसीसी लागू होगा तो समान परिस्थितियों में कोर्ट में जाने वाली दो महिलाओं से उनका धर्म पूछने के बजाय दोनों के साथ समान न्याय करेगा।
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