Shivaji Maharajs Waagh Nakha: छत्रपति शिवाजी महाराज का खास अस्त्र 'बाघ नख' बहुत जल्दी देश में लौटेगा। काफी समय से यह बाघनखा लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में शोकेस के अंदर रखा हुआ है। ब्रिटेन के अधिकारियों ने इसे भारत को लौटाने के मसौदे को अपनी मंजूरी दे दी है।
छत्रपति शिवाजी के इस बाघनखा के साथ एक रोचक कहानी भी जुड़ी हुई है। इस कथा के अनुसार मुगल बादशाह औरंगजेब के सिपहसालार अफजल खान ने शिवाजी को मारने के लिए साजिश रची। उसने शिवाजी को समझौता वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता में शर्त तय की गई कि शिवाजी महाराज अपने हथियार खेमे से बाहर छोडकर आएंगे।
शिवाजी महाराज को उसकी बातों पर विश्वास नहीं था। अतः वे इस बाघनखा को अपने हाथ में पहन कर गए। साथ ही उन्होंने अपने वस्त्रों के नीचे लोहे से बना कवच भी पहना। जैसे ही वह अंदर जाकर अफजल खान से मिले। उसने उनकी पीठ में कटार घोंपने का प्रयास किया। परन्तु लोहे का कवच होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। उसी समय शिवाजी ने अपने बाघनखा से उसे चीर दिया और उसकी तुरंत ही मृत्यु हो गई।
यह लोहे अथवा स्टील का बना एक छोटा सा हथियार होता है। इसें हाथ की अंगुलियों में इस तरह पहना जाता है कि यह हाथ की मुट्ठी में फिट हो जाता है। इससे किसी को घायल किया जा सकता है अथवा उसकी हत्या की जा सकती है।
शिवाजी महाराज के इस विशेष अस्त्र को पहले मराठा साम्राज्य की राजधानी सतारा में ही रखा गया था। बाद में अंग्रेजों के भारत आने के बाद मराठा पेशवा ने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जेम्स ग्रांप डप को उपहारस्वरूप दे दिया था। डंप ने इसे वर्ष 1824 में ब्रिटेन के विक्टोरिया और अल्बर्ट म्यूजियम को दान कर दिया था। तभी से यह वहां पर रखा हुआ है।
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