Chennai Hindus Serve Iftar 2024: रमजान का पाकीजा महीना चल रहा है। इस दौरान पूरे आलम में अल्लाह की रहमत नाजिल हो रही है। देश दुनिया से सेहरी, इफतार और नमाज की कई बेहतरीन तस्वीरें और किस्से सुनने को मिल रहे हैं। भारत की गंगा जमुनी तहजीब का कोई तोड़ नहीं है। क्योंकि यहां पर सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे से रहते हैं। हाल ही में गुलाबी नगरी जयपुर में जुमे की नमाज में खाटू श्याम जा रही यात्रा के डीजे को रोक दिया गया, बाद में नमाजियों ने भी यात्रियों के ऊपर फूलों की बारिश की। ऐसा अनोखा नजारा फिर से तमिलनाडु के चेन्नई में देखने को मिला है। पिछले 40 सालों से चेन्नई में हिंदू भाईयों द्वारा रोजा इफ्तार (Chennai Hindus Serve Iftar 2024) कराया जा रहा है। चेन्नई के मायलापुर में हिंदू मुस्लिम भाईचारे की नायाब मिसाल पेश की जा रही है। नफरत का जहर फैलाने वालों को इस न्यूज पर ध्यान देना चाहिए।
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रमज़ान में यहां हिंदू कराते है इफ्तार
(Chennai Hindus Serve Iftar 2024)
चेन्नई के हिंदू भाई पिछले 40 सालों से रमजान सेवा कर रहे हैं। ये लोग मायलापुर के सूफीदार ट्र्स्ट के तहत काम कर करते हैं। हाल ही में ट्रस्ट के हिंदू भाईयों ने मायलापुर की वालाजा बड़ी मस्जिद में मुस्लिम बंधुओँ को रोजा इफ्तार कराया। पिछले चालीस सालों से रमजान में हर दिन 1200 रोजेदारों के लिए इफ्तारी तैयार होती है। खास बात है कि ये इफ्तारी मायलापुर में राधाकृष्णा रोड पर मौजूद सूफीदार मंदिर में तैयार की जाती है। इस खुसूसी इफ्तार में फ्राइड राइस, सब्जी का अचार, केला, केसर दूध, खजूर और सूखे मेवे पेश किए जाते हैं।
कौन कराता है ये नेक काम?
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में रोजा इफ्तार कराने का ये सिलसिला पिछले 40 बरस से यूंही चला आ रहा है। बता दे कि बंटवारे के समय दादा रतनचंद सिंध से यहां आ गए थे। उनके साथ कुछ शरणार्थियों भी चेन्नई में बस गए थे। इसके बाद उन्होंने सूफीदार ट्रस्ट की स्थापना की। साथ ही उन्होंने लोगों को सूफी संत शहंशाह बाबा नभराज साहिब की शिक्षाएं बताई। हिंदू मुस्लिम एकता के लिए यह ट्रस्ट पिछले 40 सालों से लगातार खास कोशिशें करता आ रहा है।
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— MorningNewsIndia (@MorningNewsIndi) March 30, 2024
मंदिर-मस्जिद करने वाले ध्यान दें!
जहां एक और हमारे देश में बात बात पर मंदिर मस्जिद की सियासत की जाती है, नफरत फैलाई जाती है। बात बात पर हिंदू मुस्लिम किया जाता है। ऐसे दौर में चेन्नई की ये रोजा इफ्तार की खबर नफरत फैलाने वालों के लिए कांटे की तरह चुभ सकती है। लेकिन ये सच है कि साउथ इंडिया के इस अनोखे रोजा इफ्तार में गंगा जमुनी तहजीब की झलक नजर आती है। 40 साल पहले आरकोट रॉयल फैमली ने सूफीदार मंदिर का किचन देखा और बेहतरीन साफ-सफाई की वजह से रॉयल फैमिली ने इफ्तार के लिए इस किचन का इंतखाब किया। इसके बाद रॉयल फैमिली ने मंदिर की रसोई से मस्जिद के लिए इफ्तार बनाने के लिए एक सिलसिला कायम किया जो आज तक जारी है।
ये खबर हमें क्या शिक्षा देती है?
चेन्नई के इस उदाहरण से हम सब भारतीय काफी कुछ सीख सकते है। नबी ए करीम ने भी यही सिखाया है कि इंसानियत से बड़ा कोई मजहब नहीं है। रोजा इफ्तार कराने का बहुत बड़ा सवाब है जो कि तमिलनाडु के हिंदू भाईयों को खूब पता है। बात ये नहीं है कि इफ्तार कराया जा रहा है, खर्चा किया जा रहा है। बात तो ये है कि आपसी मेलजोल बढ़ाने का इससे बेहतर तरीका कोई हो ही नहीं सकता है। जयपुर में भी इसी तरह जुमे की नमाज के दौरान जौहरी बाजार में हिंदू भाईयों द्वारा वजू के पानी और बिछाने की दरी की व्यवस्था की जाती है। भले ही देश में नफरत फैलाने वाले तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन आज के इस दौर में भी हिंदू मुस्लिम भाई भाई की तरह रहते हैं। केवल राजनीति ही है जो हमें आपस में लड़वाती है।
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वक्त आ गया है सही को चुनने का
वक्त है सोचने का, मौका है दिल पे हाथ रखकर सही गलत में से किसी एक को चुनने का। अपने बच्चों को क्या हम केवल मंदिर मस्जिद के झगड़े की विरासत देना चाहते हैं या फिर चेन्नई की तरह खूबसूरत यादों का तोहफा जिसे वो अपने बच्चों को कहानी के रूप में सुना सके और खुश हो सके, गर्व कर सके कि हम सब भारतीय है। मेरा भान्जा डॉ. अनस खालिद (नोमी) चेन्नई के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है, उसी ने मुझे ये वीडियो और खबर भेजी है। मैं उसका भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि आजकल के युवा मुस्लिम अपनी स्टडी के बीच वक्त फारिग करके इस तरह की भाईचारे वाली गतिविधियों में भी हिस्सा ले रहे हैं। आखिर में जाते जाते मेरा एक शेर इरशाद कर देता हूं।
“आस्तीन के सांपों से ज़रा सावधान रहना
किसी भी मज़हब के हो मगर इंसान रहना।
पहचान कोई पूछे तो बताना उसे हिंदी हैं हम,
वतन पर मिटने वाले सदा तुम जवान रहना।।”