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नक्सलियों का गढ़ क्यों बनता जा रहा है छत्तीसगढ़?

छत्तीसगढ़ सुलग रहा है राजनीति और नक्सलवाद का गठजोड़।

कल हुए नक्सली हमले में पुलिस के डिस्ट्रिक्ट रिजर्व के 10 जवान मारे गए। मीडिया रिपोर्ट की माने तो इस दौरान एक ड्राइवर की मौत भी हो गई। नक्सलियों ने आईडी के जरिए जवानों को निशाना बनाया था। जिस पर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। आखिर छत्तीसगढ़ में ही बार-बार नक्सली घटनाएं क्यों होती है? इससे पहले भी अप्रैल 2021 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों के 22 जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा झीरम घाटी का हादसा कैसे भुला जा सकता है? जिसमें जवानों के साथ साथ दिग्गज नेता भी निशाने पर आए।

ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिर छत्तीसगढ़ में ही इतना नक्सली हमला क्यों हो रहा है?

1. इसका पहला कारण तो यह है कि यह अभी भी पिछड़ा हुआ आदिवासी क्षेत्र है।जहां शिक्षा का प्रसार अभी पर्याप्त नहीं हुआ।

2. बीहड़ जंगलों में संचार और सड़क व्यवस्था का अभाव भी एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है।

3. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद फैलने का एक कारण यह भी है कि दूसरे राज्यों में सतर्कता और सजगता से वहां की राज्य सरकारों ने उन्हें खदेड़ दिया। अब उन्हें नया ठिकाना चाहिए।

4. राज्य सरकार की मंशा का अभाव भी छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को बढ़ावा दे रहा है। जैसा कि सभी को पता है इस समस्या के लिए केंद्र सरकार अनुदान देती है। पैकेज देती है। इसी लालच में राज्य सरकार नहीं चाहती कि वहां नक्सलवाद समाप्त हो।

5. नक्सलवादियों के निशाने पर बाहर से आए जवान और स्पेशल बटालिक होती है। इसके पीछे का कारण यह है, क्योंकि उन्हें यहां की लोकेशन ठीक से पता नहीं होती।

6. एक अन्य कारण यह भी है कि बाहर से आने वाले जवान पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में अनेक बार कमजोर नेटवर्क और स्थानीय सूचनाओं से जूझते हैं। उनकी मुखबिरी की जाती है।

7. एक अन्य कारण यह भी है कि दूसरे राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में पुलिस बलों को दी जाने वाली स्पेशल ट्रेनिंग देरी से शुरू हुई।

8. छत्तीसगढ़ का दक्षिणी बस्तर इलाका आदिवासी बहुल है। जहां प्रशासन की मौजूदगी सीमित है।

9. स्थानीय जनता का सहयोग और उनके बच्चों को नक्सली बनाना भी कहीं ना कहीं नक्सलवाद को बढ़ा रहा है।
यही वे कारण है जिनकी  वजह से  नक्सलियों के निशाने पर अगर कोई राज्य सबसे आगे है तो वह छत्तीसगढ़ है।
 

अन्य कारण और समाधान

कहीं ना कहीं इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार है। केंद्र से अधिक इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। नक्सलवाद, माओवाद एक ऐसी समस्या है। जिसके समाधान के लिए केंद्र से भारी मात्रा में अनुदान मिलता है। इसी अनुदान को जारी रखने के लिए राज्य सरकारें नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त नहीं करती। राजनीति और नक्सलवाद का भी जैसे छत्तीसगढ़ में चोली दामन का साथ हो गया है। वरना यह कैसे संभव है कि जहां देश के अन्य भागों में नक्सलवाद शांत बैठा है वहां इतना सिर उठा रहा है। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने का भी एक कारण है लेकिन इसका समाधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी है। 
दूसरा कारण स्थानीय जनता और स्थानीय पुलिस भी जिम्मेदार है। ऐसा नहीं हो सकता की स्थानीय जनता को इस बात की जानकारी ना हो। लेकिन उनकी भी कुछ सीमाएं हैं ,जिनकी वजह से वह इसकी सूचना नहीं देते।

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