मणिपुर में 3 मई से शुरु हुई हिंसा ने विकट रुप ले लिया है। अभी भी वहां हिंसा का उग्र रुप थमने का नाम ही नहीं ले रहा। हाल ही में मिली खबरों के अनुसार मणिपुर हिंसा में मरने वालों की संख्या 71 हो चुकी है। 10 दिन पहले शुरु हुई हिंसा के कारण अभी वहां इंटरनेट बंद है। मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह के अनुसार हिंसा के दौरान उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प भी हुई जिसमें 6 कमांडों घायल हो गए। 1 कमांडों की मौत हो गई है।
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सलाहकार कुलदीप के अनुसार बिष्णुपुर और चुरांदपुर की सीमा वाले गांव में कुछ लोग अपने घर जल जाने के बाद वहां बचा हुआ सामान लेने गए थे। इसी बीच उग्रवादियों ने हमला कर दिया। अभी तक उन लोगों का पता नहीं चल पाया है। सामान लेने जाने वाले लोगों की संख्या 11 थी। खबरों के अनुसार इनमें से 8 लोगों ने भागकर बीएसएफ कैंप पहुंचकर अपनी जान बचाई। जबकि 3 लोगों के बारे में अभी भी कोई जानकारी नहीं मिली है।
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इनके अलावा एक गाड़ी में पीडब्ल्यूडी के 3 मजदूरों के शव मिले है जिन्हें 300 मीटर गहरी खाई से बरामद किया गया है। उनकी मौत के कारणों का भी फिलहाल कोई पता नहीं चल पाया है। मणिपुर में मैतेई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग पर 3 मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन की ओर से रैली निकाली गई थी जिसने बाद में हिंसक रुप ले लिया।
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