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Navik-01, satellite launch, जीपीएस को टक्कर देगा, इसरो का नया नाविक मिशन

अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो नए-नए इनोवेशन और कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इसरो जिसकी स्थापना 1969 में हुई थी। आज स्पेस इंडस्ट्री में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहा है। इसी कड़ी में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन इसरो एक और मिशन लॉन्च करने जा रहा है। एसडीएससी शार 29 मई श्रीहरिकोटा के दूसरे लांच पैड से सुबह 10.42 बजे जीएसएलवी f12/ एनवीएस -01 मिशन लॉन्च करने वाला है।

दरअसल यह एक नेवीगेशन सेटेलाइट है। जिसका वजन लगभग 2232 किलोग्राम है। भारी सेटेलाइट को लांच करने के लिए जीएसएलवी का इस्तेमाल किया जाता है। जियोसिंक्रोनस सैटलाइट लॉन्च व्हीकल जीएसएलवी मिशन gslv एनवीएस-01 नेवीगेशन सेटेलाइट को तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में रखा गया है। इसके बाद सेटेलाइट को इसरो ऑर्बिट में प्रेषित कर देगा।

NaVIC ( navik) की सर्विस क्या है?

इसरो इससे पहले भी नाविक जनरेशन की सेटेलाइट बना चुका है। यह सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम को और अधिक मजबूत और सशक्त करने में अपनी भूमिका निभाएगा। इसरो की माने तो एनवीएस -01 सेटेलाइट 2016 में लांच किए गए IRNSS-1G जगह लेने वाला है। यह सेटेलाइट भारतीय क्षेत्र को नेविगेशन सर्विस देने वाली 7 सैटेलाइट के एक ग्रुप का हिस्सा है। माना जा रहा है कि इसकी मिशन लाइफ 12 साल है।

नेविगेशन सिस्टम की इस सेटेलाइट को एडवांस फीचर और क्षमता के साथ बनाया गया है। ताकि यह सटीक और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराएं। इसे लगभग 36000 किलोमीटर के अपोजी के साथ जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट जीटीओ में तैनात किया जाएगा। आपको बता दें 1750 से1800 किलोग्राम अधिक भार वाले सैटेलाइट को जीएसएलवी की मदद से अंतरिक्ष ऑर्बिट में प्रक्षेपित किया जाता है।

किन-किन को होगा फायदा? 

नेविगेशन सिस्टम सेटेलाइट खासकर सामरिक दृष्टि से समुद्री मार्गो की सुरक्षा साझेदारी के साथ-साथ नेविगेशन और मछुआरों के लिए मददगार साबित होते हैं। हमारी नेविगेशन प्रणाली ना सिर्फ भारत के लिए अपितु अपने पड़ोसी देशों के लिए भी मददगार साबित होती है। वैसे नेविगेशन सिस्टम में सबसे मजबूत सिस्टम प्रणाली अमेरिका की जीपीएस है। जिसे ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम कहा जाता है। इसके अलावा रूस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपियन संघ जैसे देशों की भी अपनी नेवीगेशन सेटेलाइट प्रणाली है।

आपको याद दिला दें, जब भारत में मुंबई हमला हुआ था। उस समय हमने अमेरिका से सहयोग चाहा था। इतना ही नहीं कारगिल वार में भी हमारे पास ऐसे सिस्टम प्रणाली नहीं थी। जिसके लिए हमें दूसरे देशों पर निर्भर होना पड़ता था। लेकिन अब हमारे पास ऐसी प्रणालियां हैं। इसरो के बढ़ते कदम अंतरिक्ष में भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। इसरो ने कहा है कि लॉन्च न्यू गैलरी, SDSH-SHAR श्रीहरिकोटा से लांच देखने के लिए नागरिक https://lvg.shar.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं

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