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मणिपुर में और भयावह हो सकते हैं हालात, इतने खतरनाक हथियारों से हमले कर रहे उग्रवादी

जयपुर। पूर्वोत्तर भारत के राज्य मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में हुई ताजा हिंसा में 3 लोगों की मौत हो गई और कई घरों में आग लगा दी गई। इस हिंसा के बाद हालात और बदतर हो चुके हैं। आज सुबह भी विष्णुपुर के क्वाक्टा इलाके से जबरदस्त फायरिंग हुई जिसके बदले में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की है। आपको बता दें कि यह गोलीबारी कुकी बहुल पहाड़ी इलाके से की जा रही है। पहाड़ी इलाकों से बम और ड्रोन से हमला किया जा रहा है। हालांकि, मणिपुर पुलिस, सीडीओ, कमांडो जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। 

 

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बिष्णुपुर में हुई हिंसा के बाद लोगों में आक्रोस है। राज्य में एक कमांडो को हेड इंज्यूरी हुई है और उसकी स्थिति काफी क्रिटिकल बनी हुई है। कमांडो को बिष्णुपुर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। यहां महिलाओं में काफी रोष हैं और महिलाएं सड़क पर बैठकर प्रोटेस्ट कर रही हैं। यहां अर्द्ध सैनिक बलों को तैनात किया गया है। पिछली रात विष्णुपुर में 3 स्थानीय लोगों की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। पहाड़ी इलाकों से आ रहे ड्रोन को पुलिस और स्थानीय हथियारबंद ग्रामीण मार गिराने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा पर स्नाइपर और कमांडो तैनात किए गए हैं।

 

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सुरक्षाबलों ने बनाया बफर जोन
बीती रात बिष्णुपुर में मैतेई समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद कुकी समुदाय के लोगों के घरों में आग लगा दी गई है। पुलिस के मुताबिक कुछ लोग बफर जोन को पार करके मैतेई इलाकों में आए और उन्होंने मैतेई इलाकों में फायरिंग की। बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा इलाके से दो किमी से आगे तक केंद्रीय बलों ने बफर जोन बनाया है।

 

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3 मई को शुरू हुई थी हिंसा  
आपको बता दें कि पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में 3 मई को सबसे पहले जातीय हिंसा की शुरुआत हुई थी। मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल किए जाने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया था। तब पहली बार मणिपुर में जातीय झड़पें हुईं। हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। मणिपुर की आबादी में मैतेई समुदाय की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। कुकी और नागा समुदाय की आबादी 40 प्रतिशत से ज्यादा है। ये लोग पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

 

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ये है मणिपुर में विवाद के कारण
– राज्य में कुकी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि मैतेई अनूसूचित जनजाति का दर्जा मांग रहे हैं।
– नागा और कुकी समुदायों का मानना है कि सारी विकास की मलाई मूल निवासी मैतेई खा जाते हैं। कुकी समुदाय वाले अधिकतर म्यांमार से आए हैं।  
– मणिपुर के मुख्यमंत्री ने मौजूदा हालात के लिए म्यांमार से घुसपैठ और अवैध हथियारों को ही जिम्मेदार बताया है। करीब 200 सालों से कुकी को स्टेट का संरक्षण मिला हुआ है। इतिहासकारों के मुताबिक अंग्रेज नागाओं के खिलाफ कुकी लोगों को लाए थे। 
– जब नागा अंग्रेजों पर हमले करते थे तो उसका बचाव यही कुकी लोग करते थे। बाद में अधिकतर ने इसाई धर्म स्वीकार कर लिया जिसका फायदा मिला और एसटी स्टेटस भी मिला।  
– आपको बता दें कि मणिपुर की हिंसा सिर्फ दो ग्रुप का ही झगड़ा नहीं है, बल्कि ये कई समुदायों से भी बहुत गहरे जुड़ा है। ये कई दशकों से जुड़ी समस्या है। अभी तक सिर्फ सतह पर ही देखी जा रही है।

Anil Jangid

Anil Jangid डिजिटल कंटेट क्रिएटर के तौर पर 13 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। 10 साल से ज्यादा समय डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर राजस्थान पत्रिका, 3 साल से ज्यादा cardekho.com में दे चुके हैं। अब Morningnewsindia.com और Morningnewsindia.in के लिए डिजिटल विभाग संभाल रहे हैं।

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