Iftar ki Dua: रमजान का मुबारक पाकीजा महीना चल रहा है। मुसलमान इबादत और तिलावत में मसरूफ है। रमजान में सुबह के खाने को सेहरी तथा शाम के खाने को इफ्तारी कहते हैं। रोजा रखने और खोलने की एक खास दुआ होती है। जिसे रोजे की नीयत भी कहते हैं। हम आपको सेहरी की दुआ तो बता चुके हैं। आज हम आपके लिए हिंदी में Iftar ki Dua लेकर आए हैं। ताकि आप रोजा खोलने से पहले इसे याद कर सकें। हमें भी अपनी अफ्तारी की दुआओं में शामिल रखें।
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‘अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व- अला रिज़क़िका अफतरतू’
‘Allahumma inni laka sumtu wa bika amantu wa ‘alayka tawakkaltu wa ‘ala rizqika aftartu’
ऐ अल्लाह। मैंने तेरी रज़ा के लिए रोज़ा रखा और तेरे ही रिज़्क़ पर इफ्तार कर रहा हूं।
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अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि किसी भी रोजेदार को सेहरी खाने के बाद यानि फज्र की अज़ान से पहले एक दुआ जरुर पढ़नी चाहिए। रोजा रखने की दुआ है ‘व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमज़ान’। इस दुआ (Ramadan Roza Ki Duayen) का मतलब है कि मैं रमजान के इस रोज़े की नियत करता हूं।
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