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पूरी दुनिया में 800 जगह फैले हैं इस्कॉन मंदिर, प​ढ़ें इनका कच्चा चिट्ठा

नई दिल्ली। इस समय इस्कॉन मंदिर चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि इस्कॉन मंदिर ट्रस्ट पर कसाइयों को गायें बेचने का आरोप लगा है। ये आरोप पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद मेनका गांधी ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि "मैं अनंतपुर गोशाला गई थी, जो इस्कॉन ट्रस्ट द्वारा संचालित है। वहां पर गायों की स्थिति खराब थी और कोई भी बछड़ा नहीं था। इसका मतलब ये है कि वो लोग गाय के बच्चे को बेच देते हैं। मेनका ने यह भी कहा कि इस्कॉन ट्रस्ट इन गोवंशों को कसाइयों को बेच देता है और वो उन्हें मार देते हैं।

ISKCON ने की मेनका के बयान की निंदा

दूसरी तरफ, ISKCON के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर वृजेंद्र नंदन दास ने मेनका गांधी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि यह आधारहीन बयान है। इस्कॉन की अनंतपुर गोशाला में 240 से ज्यादा गायें हैं, जो बिल्कुल दूध नहीं देतीं, वहां सिर्फ 18-19 गायें ही दूध देती हैं। इन सभी गायों की अच्छे से देखभाल की जाती है। दास ने कहा कि गोशाला का दौरा करने पहुंचे डीएम, सांसद, विधायक और स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी कहा कि मेनका गांधी का बयान बिल्कुल गलत है। उन्होंने मेनका गांधी से यह भी पूछा कि वो ये बताएं कि वो गोशाला गई कब थीं।

 

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50 साल से सनातन धर्म की सेवा कर रहा ISKCON

दास ने कहा कि इस्कॉन एक चैरिटेबल ट्रस्ट है और 50 साल से सनातन धर्म की सेवा कर रहा है। गाय हमारी मां है। हमारी तरफ से पूरी दुनिया में गोमाता की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है। अकेले भारत में ही ट्रस्ट की 60 गोशालाएं हैं। इन सभी का ख्याल रखा जाता है। हालांकि, मेनका गांधी के बयान से इस्कॉन ट्रस्ट चर्चाओं में आ गया है। हम आपको इस ट्रस्ट के इतिहास और ये कैसे काम करता है इसके बारे में बताएंगे।

अमेरिका में रजिस्टर्ड है इस्कॉन ट्रस्ट

आपको बता दें कि इस्कॉन ट्रस्ट भारत नहीं बल्कि अमेरिका द्वारा रजिस्टर्ड संस्था है। दुनिया का पहला इस्कॉन मंदिर अमेरिका में 1966 में जब न्यूयॉर्क शहर में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना श्रीकृष्ण कृपा श्रीमूर्ति श्री अभय चरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की थी। स्वामी प्रभुपाद का जन्म भारत के कलकत्ता में हुआ था, लेकिन बाद में वो अमेरिका में बस गए। इस्कॉन के अनुसार प्रभुपाद ने पश्चिमी देशों में भगवान कृष्ण का संदेश फैलाने के लिए वृन्दावन छोड़ दिया था। वो भगवान कृष्ण से जुड़ी किताबों से भरा ट्रक लेकर बोस्टन पहुंचे थे। प्रभुपाद 1966 तक न्यूयॉर्क में रहे, जहां वो हर हफ्ते भगवत गीता पर व्याख्यान देते थे। इसके बाद श्री प्रभुपाद ने लॉस एंजिल्स, सिएटल, सैन फ्रांसिस्को, सांता फे, मॉन्ट्रियल और न्यू मैक्सिको आदि शहरों में मंदिरों की स्थापना की। इसके बाद 1969 और 1973 के बीच कनाडा, यूरोप, मैक्सिको, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और भारत में कई मंदिरों का निर्माण किया गया।

 

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इस्कॉन ट्रस्ट का कोई मालिक नहीं

आपको बता दें कि इस्कॉन ट्रस्ट का कोई मालिक नहीं है। सन् 1977 में इसके संचालन के लिए श्रील प्रभुपाद ने एक ग्रुप की स्थापना की थी जिसे गवर्निंग बॉडी कमीशन कहा जाता है। इस कमीशन की बैठक प्रत्येक वर्ष पश्चिम बंगाल के मायापुरा में होती है। इस्कॉन का प्रत्येक मंदिर अपना कामकाज स्वयं देखता है।

दुनियाभर में फैले हैं 800 से ज्यादा इस्कॉन मंदिर

इस्कॉन दुनिया की एक प्रमुख धार्मिक संस्था भी बन कर उभरी है। दुनियाभर में इस्कॉन के 800 से ज्यादा सेंटर, मंदिर और ग्रामीण समुदाय मौजूद हैं। इसके 100 से ज्यादा शाकाहारी रेस्त्रां भी हैं। दुनियाभर में इस्कॉन के लाखों सदस्य हैं। श्री प्रभुपाद ने 1972 में भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट की स्थापना की थी। इस्कॉन के अनुसार, ये भगवान कृष्ण की पुस्तकों के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है।

इस्कॉन के सदस्यों का काम

इस्कॉन के सदस्य अपने घरों में भक्ति योग का अभ्यास करते हैं। साथ ही वो मंदिरों में पूजा-अर्चना भी करते हैं और योग सेमिनार, फेस्टिवल, पब्लिक जप और साहित्य वितरण के जरिए भगवान कृष्ण के प्रति चेतना को बढ़ावा देते हैं। इस्कॉन द्वारा स्कूल, कॉलेज, इको-विलेज, फ्री फूड डिस्ट्रीब्यूशन और दूसरे संस्थान भी खोले गए हैं।

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