Itikaf Rules in Hindi : रमजान का दूसरा अशरा चल रहा है। तीसरे अशरे के पहले एक खास अमल किया जाता है जिसे एतिकाफ कहते हैं। एकांत में अल्लाह का ध्यान लगाने की प्रक्रिया को एतकाफ कहा जाता है। अरबी में एतकाफ का मतलब होता है एक जगह थम जाना, ठहर जाना। यानी बीसवे रमजान की शाम को ऐतिकाफ का आगाज होता है। जिसमें बंदा 20वें रमजान की मगरिब की नमाज के बाद बाहरी दुनिया से कट होकर मस्जिद में एक कोने में पर्दा करके अल्लाह की इबादत करता है। औरतों के लिए घर के कोने में एतकाफ का हुक्म है। अल्लाह ने एतकाफ के संदर्भ में मोमिन के लिए कुछ नियम कायदे (Itikaf Rules in Hindi) बनाए हैं जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है। हम आपको वही नियम कायदे बता रहे है ताकि आपका एतकाफ रब की बारगाह में फौरन कुबूल हो जाए और आपको 2 हज तथा 2 उमराह का सवाब अपने घर के बगल वाली मस्जिद में ही मिल जाएँ।
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एतिकाफ में मर्द मस्जिद में तथा औरतें घर के किसी कोने में बैठ सकते हैं। हालांकि ऐतिकाफ के दौरान कई लोग मस्जिद के बाहर भी निकल जाते हैं। लेकिन बिना किसी ठोस वजह के एतिकाफ वाली जगह से बाहर नहीं जाना चाहिए अन्यथा एतकाफ मकरूह हो सकता है। बस नहाने, पाखाना और पेशाब करने के लिए मोमिन बाहर निकल सकता है। वो भी जब कोई उसे देखने वाला नहीं हो। यानी सुबह जल्दी ही नहा ले। पेशाब करने जाना हो तो बाहर किसी को आवाज देकर जाएं।
औरतों के लिए एतिकाफ में हुक्म है कि वे अपने शौहर से सोहबत न करें। साथ ही घर में वे जरूरत का काम पर्दे में रहते हुए कर सकती है। लेकिन किसी को अपना चेहरा जाहिर न होने दे। एतिकाफ में बैठा शख्स अपनी बीवी या अपने शौहर से अगर कोई इमरजेंसी हो तो मुलाकात कर सकता है, लेकिन उसे एक दूसरे से हमबिस्तरी करने की इजाजत नहीं होगी। यानी के बीवी के साथ संबंध बनाने पर एतिकाफ टूट जाएगा।
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इसके अलावा एतकाफ में बैठे शख्स के लिए किसी काम से बाजार जाने, किसी मरीज की तबीयत पूछने जाना, किसी मय्यत के जनाजे में हिस्सा लेने या फिर किसी अन्य सार्वजनिक काम में हिस्सा लेने की मनाही है। आपको केवल 10 दिन तक दुनिया से कटकर अल्लाह से लौ लगानी है। ईद का चांद दिखने पर ही आपको बाहर निकलना है। लेकिन ढोल ढमाकों और आतिशबाजी से परहेज करें। वरना सारी इबादत बेकार चली जाएगी।
बीसवें रमजान की शाम से यानी इस साल एतकाफ पर बैठने वाले हजरात 31 मार्च 2024 की शाम को मगरिब की नमाज के बाद से ही एतिकाफ पर बैठ सकते हैं। एतिकाफ में बैठने वाले बंदे 21वीं तरावीह पर्दे में ही पढ़ेंगे। यानी रोज इनको इफ्तार की प्लेट पर्दे में ही दे दी जाएगी। सेहरी भी ऐसे ही करेंगे। दस दिन तक तन्हाई में मौला की रजा हासिल करनी है। खास तौर पर पांचों शबे कद्र में जमकर नमाज, जिक्र और तिलावते कुर्आन करनी है।
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