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नेक्स्ट जनरेशन नेवीगेशन नाविक (Navik-01) लॉन्च कर, इसरो ने रचा इतिहास

नेक्स्ट जनरेशन के अत्याधुनिक हथियार, उपकरण, सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम बनाने में अब भारत ने अग्रणीय भूमिका निभा ली है। आज इसरो ने नाविक के नेक्स्ट जनरेशन के पहले सैटेलाइट एनवीएस- 01( NVS- 01) को लॉन्च किया है।
 

क्या है इसमें खास?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने स्पेस सेंटर में धूम मचा रखी है। नाविक सीरीज में नेक्स्ट जनरेशन सेटेलाइट को आज सफलतापूर्ण लॉन्च कर दिया गया है। इसका पूरा नाम नेविगेशन विद इंडियन कॉन्सिलिएशन (Navigation with Indian consolation) है। इस सैटेलाइट को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया है। भारी वजन इस सेटेलाइट कार्ड वजन 2232 किलोग्राम है। इस सैटेलाइट को जीएसएलवी (GSLV) सेटेलाइट से अंतरिक्ष ऑर्बिट में प्रतिस्थापित किया गया है।

आपको बता दें, नाविक पृथ्वी के ऑर्बिट में 7 सैटेलाइट का एक (ग्रुप) समूह है। इस ग्रुप के बढ़ जाने से हमें नेविगेशन की सटीक और सही जानकारियां प्राप्त होंगी। इसरो द्वारा लांच यह सेटेलाइट गूगल मैप से भी बेहतर साबित होने वाला है।

माना गूगल और एप्पल की जीपीएस सेवाएं यूजर के लिए मुफ्त में उपलब्ध है। इसके बावजूद भी इसके ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम में भारत का नाविक सेटेलाइट एंट्री मार चुका है। आगे चलकर भारतीय यूजर अब दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेंगे। खासकर समुद्रिक सामरिक महत्व के लिए।
 

क्या है खास?
NVS- 01 के बारे में इसरो ने जानकारी देते हुए बताया। यह पहला सेटेलाइट है। जिसमें परमाणु घड़ी की सुविधा है। जो कि सटीक जानकारियां देती है। इस सीरीज में एल वन (L1) बैंड सिग्नल्स को भी जोड़ा गया है। इस सेटेलाइट में 2.4 केडब्लू (KW) का पावर जनरेट करने की क्षमता के साथ लिथियम आयन बैटरी सपोर्ट के साथ तैयार किया गया है।

नाविक लॉन्च होने के बाद भारत को एक मजबूत सेटेलाइट मिल गया है। यह सेटेलाइट भारत की सीमाओं के बाहर 1500 किलोमीटर तक के एरिया को कवर करेगा। इसका फायदा भारत को ही नहीं अपितु इसके पड़ोसी देशों को भी होने वाला है। लोकेशन बेस्ड सर्विस स्टेशन इन ताकतों को बल देने का काम करेगी।

भारत में आतंकवाद बाहुल्य क्षेत्रों में सर्वे और मॉनिटरिंग करना आसान होगा। इस सर्विस का इस्तेमाल साइंटिफिक रिसर्च के लिए मददगार होगा।
इसरो ने रविवार को सुबह 7:12 पर इसकी उल्टी गिनती शुरू की। यह उपकरण अंतरिक्ष में भू- स्थित स्थानांतरण कक्षा जीटीओ में स्थापित हुआ।

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