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सट्टा बाजार ने कोटा सीट पर किया बड़ा दावा, PM मोदी भी होंगे हैरान!

Phalodi Satta Bazar 31 May 2024: लोकसभा चुनाव की मतगणना का काउंटडाउन शुरू हो ने में अब 5 दिन का समय बचा है। लेकिन 4 जून के चुनावी परिणाम से पहले सट्टा बाजार में कई सीटों को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है और इस बार राजस्थान में बीजेपी का मिशन 25 पूरा होता नहीं दिख रहा है। इसके साथ ही कोटा-बूंदी लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक है क्योंकि दोनों नेता कभी किसी समय में एक ही पार्टी में थे लेकिन इस बार दोनों का आमना-सामना होगा।

कोटा बीजेपी का गढ़

कोटा लोकसभा सीट पर 8 विधानसभा है और इस बार 5 विधानसभा में इस बार 70% से ऊपर वोटिंग हुई है। इस सीट पर 20 लाख मतदाता हैं और 14 लाख 7मतदाताओं ने वोट डाला है यानि इस बार जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहेगा। वोटिंग बढ़ने और घटने को लेकर कई प्रकार के कयास लगाए जाते है लेकिन इसके बाद भी इस सीट पर टक्कर कड़ी मानी जा रही है।

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बराबरी का मुकाबला

कोटा-बून्दी लोकसभा सीट पर 8 विधानसभा है और विधानसभा चुनाव में चार पर भाजपा और चार पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। कुछ सीटों पर इस बार 70% से अधिक वोटिंग हुई इसका फायदा किसको होगा यह बात तो 4 जून को पता चलेगी। लेकिन इस बार बिरला की जीत आसान नहीं होगी।

ओम बिरला चुनाव नहीं हारे

बीजेपी प्रत्याक्षी ओम बिरला अब तक कोई चुनाव नहीं हारे है और जब भी वो चुनाव लड़े जीत मिली है। साल 2003, 2008, 2013 में MLA का चुनाव जीता और इसके बाद 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। दूसरी बार सांसद बनते ही उनको लोकसभा स्पीकर का सवैधानिक पद मिला और वह पीएम मोदी के करीबी माने जाते है। उनके कार्यकाल में संसद में कई रिकॉर्ड बने है और इसी वजह से उनको लेकर जनता में काफी उत्साह है।

प्रहलाद गुंजल पुराने साथी

कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद गुंजल कभी बीजेपी में हुआ करते थे और अब 5 विधानसभा चुनाव लड़े और तीन में हार मिली, दो चुनाव जीते। गुंजल और बिरला में गहरी आदावत है, गुंजल ने यह चुनाव अपने चेहरे पर लड़ा है और कांग्रेस को इसका फायदा मिला है। इस सीट पर अब तक 16 लोकसभा चुनाव हुए, कांग्रेस-4, बीजेपी-6 और 3 बार भारतीय जनसंघ ने जीत हासिल की है।

जातिगत समीकरण

कोटा-बून्दी लोकसभा सीट पर जातिगत समीकरण पूरी तरह से हावी है। यहां सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता, मीणा मतदाता, ब्राह्मण और गुंजल जाति के वोट है। गुर्जर मतदाता का झुकाव गुंजल की तरफ होने से उनका पलड़ा भारी नजर आ रहा है। दोनों ही पार्टियों ने जातिगत समीकरण के आधार पर अपनी—अपनी जीत के दावे कर रही है। लेकिन 4 जून को इस बात का पता चल जाएगा की जनता ने किसको अपना नेता चुना है।

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