भारत का मून मिशन यानी चंद्रयान 3 आज चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड कर गया है। इसके लैंड करते ही देश ही नहीं दुनिया में चंद्रमा की सतह पर लैंड करते ही भारत चांद के साउथ पोल पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इसके साथ ही भारत के प्रधानमंत्री मोदीने यह ऐलान कर दिया कि बहुत जल्द भारत का तिरंगा चांद के बाद सूरज और शुक्र पर फहरेगा।
भारत ने किया अजूबा
भारत ने जो किया वह अभी तक दुनिया में कोई नहीं कर पाया है। चांद पर चंद्रयान 3 के पहुंचने के साथ ही तिरंगा और भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ दिखा। जिसे देखकर देशवासियों के चेहरे पर मुस्कान और गर्व के भाव आ गये।
चंद्रयान-3 के चारों ओर क्यों है सुनहरा आवरण
नासा ने खोजा था शुक्र को
नासा के मेरिनर 2 से 14 दिसंबर, 1962 को उड़ान भरी थी। तब बादलों से ढकी दुनिया को उसने स्कैन किया था। अमेरिका और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के कई अंतरिक्ष यान ने शुक्र की खोज की थी। मैगलन ने ही इस ग्रह की सतह को अपने राडार से मैप किया था।
चंद्रयान-3 मिशन पर आया कितना खर्च
इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन पर 615 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इससे पहले चंद्रयान-2 मिशन पर 978 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें से 603 करोड़ रुपये ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर, नेविगेशन और ग्राउंड सपोर्ट नेटवर्क पर और 375 करोड़ रुपये जियो स्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल पर खर्च किए गए थे।
क्या काम करेगा चंद्रयान
चंद्रयान-3 का लैंडर-रोवर चांद पर 1 दिन यानि पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करेगा। इसरो के इस महत्वाकांक्षी मिशन से पूरे देशवासी खुश हैं। लेकिन अब जानते हैं कि चंद्रयान 3 चांद पर 14 दिन तक रह कर क्याकृक्या काम करेगा
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