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Ramadan in Arctic: जिन देशों में सूरज नहीं डूबता वहां रमजान के लिए ये हैं नियम, मुसलमान भी नहीं जानते!

Ramadan in Arctic: पवित्र महीना रमजान बस दो दिन दूर है। मुस्लिम बंधु इस महीने में रोजे रखते हैं, साथ ही गुनाहों से बचकर रहते हैं। रमजान का चांद भारत में 11 मार्च 2024 को नजर आ सकता है। अरब देशों में 10 मार्च को Ramadan का पाकीजा महीना 10 मार्च की शाम से शुरु होने की पुरजोर संभावना है। रोजा शाम के समय सूरज अस्त होने के बाद खोला जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन देशों में सूरज अस्त ही नहीं होता है, वहां के मुसलमान रोजा कैसे रखते होंगे। ध्रुवीय देशों में 6 महीने का दिन और 6 महीने की रात होती है, ऐसे में अगर रमजान का चांद वहां देखना हो या रोजा खोलना हो तो क्या नियम कायदे हैं, इसी पर हम बात करेंगे। ध्रुवीय इलाकों में रमजान को लेकर (Ramadan in Arctic) खास नियम बनाए गए हैं। ये जानकारी आम मुसलमानों तक भी पहुंचाएं कि किस तरह साइंस और इस्लाम का संबंध सदियों पुराना है।

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जहां सूरज नहीं डूबता वहां रमजान कैसे?
(Ramadan in Arctic)

ध्रुवीय इलाकों में सूरज 6 महीने तक डूबता ही नहीं है, वहां के लिए रमजान में कुछ खास नियम बनाए गए हैं। जूनू, अलास्का में मुसलमान रोज़ा तो रखते हैं लेकिन नियम मक्का के चलते हैं। आर्कटिक सर्किल में सूरज मध्यरात्रि में दिखाई देता है, और उत्तरी फिनलैंड में तो सूरज 60 दिनों तक बिल्कुल भी नहीं दिखता है। इसीलिए इन Polar देशों (Ramadan in Arctic) में रमजान के दौरान मक्का शरीफ सऊदी अरब के सेहरी और इफ्तारी का टाइम मान्य होता है। नॉर्वे जैसे देश में भी रोजा इफ्तार का समय मक्का के समय पर आधारित होता है।

जहां Ramadan का चांद नहीं दिखता वहां का क्या?

इसी तरह जहां पर रमजान का चांद नजर नहीं आता है, वहां के लिए भी खास नियम है। ऐसे देश में जहां चांद नजर नहीं आता है, वहां के मुस्लिम बंधु निकटतम स्थान के अनुसार रोजा शुरू कर सकते हैं। हालांकि कुछ इस्लामी उलमा पवित्र शहर मक्का में चंद्रमा को देखने के आधार पर रोज़े के महीने की शुरुआत करने के लिए कहते हैं। कुल मिलाकर जहां रमजान का चांद नजर आ चुका है, वहां के समय के अनुसार भी आज सेहरी इफ्तारी कर सकते हैं। इस साल आइसलैंड में दुनिया का सबसे लंबा रोजा रखा जाएगा।

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भारत में Ramadan कब है?

भारत में रमजान का चांद अरब देशों के एक दिन बाद दिखाई देता है। चूंकि हिजरी कैलेंडर में हर साल 11 दिन महीने ऊपर खिसक जाते हैं, इसीलिए इस साल अरब में 10 मार्च को रमजान का चांद नजर आने की पूरी संभावना है। इस आधार पर भारत में Ramzan Ka Chand 11 मार्च 2024 की शाम को नजर आ सकता है। बाकी जामा मस्जिद दिल्ली की हिलाल कमेटी अंतिम निर्णय अरब देशों में चांद दिखने के बाद ही लेती है। यानी पहला रोजा 12 मार्च 2024 की सुबह रखा जाएगा। खत्म सेहरी का वक्त इंशाअल्लाह 5 बजकर 18 मिनट पर रहेगा, वही इफ्तार का वक्त शाम 6 बजकर 27 मिनट होगा।

अरब देशों में Ramadan एक दिन पहले क्यों?

अरब देशों का टाइम जोन भारत से आगे चलता है, इसीलिए हमारे यहां चांद अगले दिन नजर आता है। वहां एक दिन पहले ही रमजान या ईद का चांद नजर आ जाता है। इस साल सऊदी अरब में रमजान का चांद 10 मार्च 2024 को दिखने के आसार है। भारत में 11 मार्च की शाम को Ramzan Ka Chand नजर आ सकता है।

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