Ramzan me Cigarette : सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी लिखी होती है, धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन फिर भी लोग इसे पीते हैं और कैंसर का शिकार होते हैं। इस्लाम एक ऐसा मजहब जो कि पूरी तरह से प्रेक्टिकली है। इस्लाम में नशा करना और सिगरेट पीना पूरी तरह से हराम है मना है। इन दिनों रमजान का महीना चल रहा है। लेकिन जो मुसलमान सिगरेट की लत के शिकार हो चुके हैं उनके लिए रोजा बहुत भारी पड़ता है। हालांकि आप चाहे तो रमजान के महीने में सिगरेट की लत से अल्लाह की मदद से छुटकारा पा सकते हैं। लेकिन इसके लिए बंदे में विल पावर मजबूत होनी चाहिए। हम आपको बताएँगे कि क्या सिगरेट पीने से रोजा (Ramzan me Cigarette) टूट जाता है या नहीं। ताकि मोमिन मर्द और औरतें जो कि सिगरेट तंबाकू बीड़ी के शौकीन है वे हिंदी भाषा में ये जानकारी प्राप्त कर सके और अपने ईमान की हिफाजत कर सके। वैसे हमारी राय तो यही है कि आज ही इस बुरी लत से पीछा छुड़ा ले।
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इस्लाम में किसी भी तरह का नशा करना सख्त मना है। जिसमें सिगरेट बीड़ी भी शामिल हैं। ऐसे में रोजे की हालत में बीड़ी, सिगरेट, हुक्का पीने या पान-गुटखा खाने से रोजा टूट जाएगा। मतलब कि अगर रोजेदार ने रोजे की हालत में सिगरेट, बीड़ी या हुक्के का कश (Ramzan me Cigarette) लिया तो उसका रोजा वही पर टूट जाएगा। हमारी आपसे यही गुजारिश है कि खुद पर काबू रखे और रोजे की हालत में सिगरेट, बीड़ी आदि नहीं पिये। इफ्तार के बाद आप अपना शौक पूरा कर ले। लेकिन शरीयत के हिसाब से वो भी मना है।
वैसे तो सिगरेट सेहत के लिए नुकसानदायक है और शरीयत में इसे मना फरमाया है। लेकिन किसी मरीज को या इलाज के तौर पर तंबाकू का सेवन किया जा सकता है। हालांकि शरीयत के अनुसार शौकिया सिगरेट पीना (Ramzan me Cigarette) पूरी तरह से हराम है। पेट से संबंधित बहुत सी बीमारियों में हुक्का तंबाकू पीना दवा के तौर पर सही साबित होता है। ऐसे हालात में देवबंद के मुताबिक हकीम या डॉक्टर की सलाह के बाद मुसलमान सिगरेट या हुक्का दवा के तौर पर थोड़ा बहुत इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन उसकी आदत बना लेना बहुत बड़ा गुनाह है।
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इस्लाम में शराब, सिगरेट और हुक्का जैसी नशीली चीजे मना है। शराब को तो पूरी तरह ही हराम करार दिया गया है। लेकिन सिगरेट और तंबाकू का सेवन कुछ मुसलमान (Ramzan me Cigarette) आज भी करते हैं। शरीयत की माने तो हर वो नशा जिसमें आदमी बेसुध हो जाए होशो हवास खो बैठे वो नशा करना इस्लाम में हराम माना गया है। जैसे भांग का नशा भी मुसलमानों के लिए मना है।
कहते है कि किसी भी आदत को लगने और छोड़ने के लिए लगातार 21 दिन का अभ्यास जरूरी है। तो मुसलमान चाहे तो वह रमजान के महीने में आराम से सिगरेट और तंबाकू की लत से निजात पा सकता है। क्योंकि इस महीने में शैतान भी कैद रहता है। ऐसे में बंदे को सिर्फ अपने मन को काबू करना है। नफ्स की वजह से ही वह सिगरेट (Ramzan me Cigarette) की तलब करता है। हमारी सभी युवा मुस्लिमों से अपील है कि आज से ही सिगरेट से तौबा कर ले। क्योंकि जान है तो जहान है। नहीं तो एक बार कैंसर के अस्पताल में जाकर एक दिन ठहरकर आ जाए। आप खुद ही सिगरेट के नतीजे देख लेंगे तो जरूर इससे किनारा कर लेंगे।
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