Shabe Qadr Dua : रमजान का सबसे खास तीसरा अशरा आज शाम से शुरु होने जा रहा है। आज भारत में 20वां रोजा है। 31 मार्च 2024 की शाम को ही 21वीं तरावीह के साथ ही रमजान का तीसरा अशरा शुरु हो जाएगा। बंदे को जहन्नम की आग से निजात मिलेगी साथ ही आज की रात पहली शबे कद्र है। लैलतुल कद्र यानी शबे कद्र जिसे हजार महीनों से अफजल माना जाता है। भारत में 31 मार्च की रात को पहली 21वीं शब होगी जिसे लैलतुल कद्र भी कहा जाता है। इसके बाद चार रातें और आएंगी। इन पांचों रातों में से कोई एक रात ही लैलतुल कद्र की रात कही जाती है। हम आपको शबे कद्र में पढ़ने के लिए एक खास दुआ (Shabe Qadr Dua) बता रहे है जो नबी ए करीम ने बताई थी। अल्लाह हम सबको लैलतुल कद्र की कद्र करने की तौफीक अता करें। सिर्फ एक रात जागकर अगर 84 बरस इबादत का सवाब मिल रहा है तो ये बहुत ज्यादा फायदे का सौदा है। समझने वाले ही इसकी कद्र जान पाते हैं।
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हजरत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) बयान करती हैं कि, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सवाल किया कि यदि मैं शबे क़द्र की रात को पा लूँ तो क्या दुआ करू, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ये दुआ बतलाई –
“अल्लाहुम्मा इंनका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफवा फ’अफु अन्नी”
ऐ अल्लाह अज़्ज़वजल आप बहुत माफ़ करने वाले हो, आपको माफ़ करना पसंद है, इसलिए मुझे माफ़ कर दो।
اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي
O Allah you are the Most Forgiving, and One who loves forgiving, therefore forgive me
रमजान के आखिरी अशरे की बाबरकत रात को कुरान मजीद में लैलतुल कद्र की रात कहा गया है। सूरह कद्र में अल्लाह तआला फरमाते हैं कि हमने कुरान को इसी रात में नाजिल किया। चूंकि जिस रात अल्लाह अपने रसूल को ये बात बताने वाले थे के शबे कद्र कौनसी रात होगी उसी समय दो बंदे आपस में लड़ रहे थे। बस उनके लड़ाई झगड़े की वजह से लैलतुल कद्र की तारीख उठा ली गई। यही वजह है कि बंदे को अब पांच रातों में इसे तलाश करना पड़ता है।
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शबे कदर आखिरी रमजान की पांच रातों में से कोई एक होती है। मतलब बंदों को पांचों विषम रातों में जागकर इलाही को राजी करते हुए इस रात को तलाश करना होता है। 21,23,25,27 और 29वीं रात में से कोई एक रात ही शबे कद्र होती है। इस बार 31 मार्च,2 अप्रैल,4 अप्रैल,6 अप्रैल,8 अप्रैल में से कोई एक रात लैलतुल कद्र होगी। भारत में 27वीं शब का महत्व ज्यादा है जो कि अलविदा जुम्मे के अगले दिन यानी शनिवार 6 अप्रैल 2024 को है। अल्लाह हमें रमजान के तीसरे अशरे की कद्र करने की तौफीक नसीब अता करें।
रमजान के आखिरी अशरे की एक अहम इबादत ऐतिकाफ है। ऐतिकाफ मतलब दुनिया से कटकर मस्जिद में एकांतवास करना जिसे महिलाएं घर पर कर सकती है। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमेशा रमजान के आखिरी अशरे में ऐतिकाफ फरमाते थे। दस दिनों के लिए मस्जिद में ही खाना पीना और सोना होता है। एतिकाफ से बस्ती का अजाब टाल दिया जाता है। ईद का चांद दिखने पर एतिकाफ खत्म होता है।
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