अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था वहीं केंद्र सरकार ने इस फैसले को पलटकर दिल्ली सरकार को टेंशन में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दिल्ली सीएम केजरीवाल गदगद हो उठे थे वहीं केंद्र सरकार के एक अध्यादेश से उनके चेहरे पर उदासी छा गई है। दिल्ली के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लाई है जिसमें केजरीवाल की पावर छीनकर एलजी को दे दी गई है। केंद्र के अध्यादेश के तहत राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के गठन की बात की गई है।
केंद्र सरकार के अध्यादेश की खास बाते
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हए दिल्ली सरकार के लिए अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश के अनुसार ट्रांसफर-पोस्टिंग और विजिलेंस का काम NCCSA देखेगा। अकेले सीएम ट्रांसफर-पोस्टिंग का फैसला नहीं ले सकते। बहुमत के आधार पर किसी भी विवाद में उपराज्यपाल का अंतिम फैसला मान्य होगा। दिल्ली सीएम इस प्राधिकरण के प्रमुख होंगे। इसके अलावा दिल्ली के प्रधान गृह सचिव पदेन सचिव होंगे और दिल्ली मुख्य सचिव, प्रधान गृह सचिव प्राधिकरण के सचिव होंगे। अध्यादेश को 6 महीने में संसद से पास कराने के बाद कानून का रुप लेगा।
बता दें कि 11 मई को सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बैंच ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाकर ताकत बढ़ा दी थी। वहीं केंद्र सरकार के अध्यादेश ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निष्प्रभावी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया था कि पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड को छोड़कर अन्य मामलों में प्रशासन पर नियंत्रण चुनी हुई सरकार का होगा। लेकिन नए अध्यादेश के जरिए दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का नया सिस्टम लागू कर दिया है।
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