कंजंक्टिवाइटिस यानि आई फ्लू इन दिनों तेजी से फैल रहा है। राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई राज्यों में इसके केस सामने आ रहे हैं। इस बीमारी के लिए वर्तमान समय में डॉक्टर के पास कई सारे इलाज होंगे लेकिन 1990 में इसके लिए केवल एक ही दवाई थी जिसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे कई स्थानों पर टोटा के नाम से जाना जाता है। इस दवाई को फोटो और इसके अनोखे नाम के साथ सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है।
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समय के साथ बदला नाम
आई फ्लू में आंखें लाल होने पर लोगों को साल 1990 वाली एक दवाई बहुत याद आ रही है। वर्तमान में यह दवाई क्लोरामफेनिकोल आई ऑइंटमेंट के नाम से दुकानों पर मिलती है। कई लोग इसे आंखों का कैप्सूल, नीम कौड़ी, निम्बोली, चिपरा दवाई, पिनसीलीन, लोसना ट्यूब के नाम से जानते हैं। इस बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है बल्कि यह तीन-चार दिन में अपने आप मिट जाती है।
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पहले से महंगी हुई दवाई
पहले जहां आंखें आने पर 2 रुपये का टोटा ही कमाल कर देता था वहीं अब नए नाम के साथ दवाई की कीमत भी बढ़ गई है। क्लोरामफेनिकोल आई ऑइंटमेंट अब 20-25 रुपये में मिल रही है। इस दवाई के ट्यूब भी बाजार में आ गए है जो अधिक कीमत में उपलब्ध हैं। यह एंटीबायोटिक आंखों में संक्रमण फैलने से रोकता है।
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