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भारत में प्रदूषण का तीव्र गति से बढ़ना अभी भी चिंता का विषय, क्या डब्ल्यूएचओ के मानक पर खरे उतरे हम?

क्या, वास्तव में वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ है? वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। ऐसा  वर्ल्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स की हालिया रिपोर्ट से ज्ञात हुआ है।

क्या कहती है रिपोर्ट?
स्विस फर्म आईक्यू एयर की वर्ल्ड एयर क्वालिटी के आधार पर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 50 शहरों में से 39 शहर भारत के है। क्या भारत के लिए भी यह खबर अच्छी है?

क्या कहती है गाइडलाइन?
प्रदूषण का पैमाना हवा में प्रदूषण नापने की इकाई पीएम 2.5 से आंका जाता है। इस बार इसमें गिरावट देखने को मिली है।

किंतु क्या अभी भी हम सेफ गाइड लाइन में हैं?
नहीं, अभी भी हम डब्ल्यूएचओ की सेफ गाइडलाइन में नहीं आएं है। हमारे देश खासकर उसके मेगा मेट्रो सिटी, महानगरों के साथ-साथ अब प्रदूषण का स्तर टीयर 2 शहरों में भी अपने पैर पसार रहा है। यही कारण है कि भारत स्विस फर्म आइक्यूएयर की वर्ल्ड एयर क्वालिटी के आधार पर आठवें स्थान पर आया है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि वर्ल्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स में टॉप 20 प्रदूषित शहरों में 19 एशिया के, जिनमें आधे से अधिक भारत के हैं।

प्रतिबंधित हो बीएस 3 पेट्रोल और बीएस 4 डीजल वाहन
सरकार खासकर दिल्ली की, जब जब दिल्ली के प्रदूषण में वृद्धि होती है। इन वाहनों पर अल्पकालीन प्रतिबंध लगा देती है। उसके बाद इन वाहनों को फिर से छूट मिल जाती है। यही हाल अन्य शहरों का भी हो रहा है।

 क्यों हो रहा है ऐसा
बढ़ता औद्योगिकरण, आधुनिकीकरण और अंधाधुंध निर्माण कार्य इसमें एंजाइम का काम कर रहे हैं। धूल धुआं के गुब्बार के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और बिल्डिंग निर्माण भी अंधाधुंध हानिकारक गैसों का वातावरण में अपना प्रभाव छोड़ रहे हैं।  जनवरी में दिल्ली के प्रदूषण का स्तर 400 से अधिक था। तब सरकार ने बीएस 3 पेट्रोल और बीएस 4 डीजल के वाहनों पर अल्पकालीन प्रतिबंध लगाया था। ज्ञात हो कि दिल्ली की वायु गंभीर श्रेणी में रोग उत्पन्न कर रही है।
हम अभी भी डब्ल्यूएचओ मानक से सात से आठ गुना जहरीली गैस अपनी सांस में ले रहे हैं। जिसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों के साथ-साथ महिलाओं पर भी पड़ रहा है।

आए दिन अस्पतालों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही है। हवा की गुणवत्ता में लगातार कमी आ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ-साथ जनसाधारण को भी इस ओर जागरूक होना चाहिए।

सरकारी प्रयास अभी भी जमीनी धरातल पर खरे नहीं उतर रहे। इसी का परिणाम है कि 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 शहर हमारे हैं। इसमें भी सबसे टॉप पर राजधानियों में दिल्ली है। जहां प्रदूषण का स्तर 92.7: आंका गया है। वही भारत का प्रदूषण स्तर 53.3 के साथ 8 वे स्थान पर रहा। जो डब्ल्यूएचओ के मांनक़ पर खरा नहीं उतर रहा।

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