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Dausa by-election : जयपुर। दौसा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार डीसी बैरवा ने भाजपा उम्मीदवार और किरोड़ी लाल मीणा के छोटे भाई जगमोहन मीणा को 2300 वाटों से हराया दिया है, लेकिन जब कांग्रेस पार्टी ने डीसी बैरवा को टिकट दिया था, जब पूर्व सीएम अशोक गहलोत सहित कई दिग्गज नेता कह रहे थे कि दौसा का मैच फिक्स हो चुका है, लेकिन डीसी बैरवा ने यहां से जीत दर्ज कर उनके मुंह को बंद कर दिया है, आइए जानते है क्या है पूरा मामला?
बता दें कि दौसा विधानसभा उपुचनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपना टिकट कांग्रेस नेता सचिन पायलट और दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा की सलाह से डीसी बैरवा को दिया था, लेकिन जब डीसी बैरवा ने यहां से पर्चा भरा तो राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा भी पहुंचे थे। इस दौरान गहलोत ने बयान दिया था कि दौसा का मैच फिक्स है। उनका कहने का मतलब था कि दौसा में सचिन पायलट और मुरारी लाल मीणा ने जानबूझकर कांग्रेस का टिकट डीसी बैरवा को दिलाया है, क्योंकि बीजेपी ने पहले ही भाजपा का टिकट का ऐलान कर दिया था।
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बता दें कि बुधवार को दौसा के नए विधायक डीसी बैरवा कांग्रेस नेता सचिन पायलट के आवास पर पहुंचे। उन्होंने कहा, पायलट साहब ने इस सीट पर बहुत पसीना बहाया था, जो कहते थे मैच फिक्श है कमजोर प्रत्याशी है उनके मुंह बंद हो गए है। भले कांग्रेस को दौसा से मामूली अंतर से जीत मिली है लेकिन पायलट साहब ने उपचुनाव में कांग्रेस की लाज बचा ली है, क्योंकि भाजपा मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस सीट पर धुआंधार प्रचार किया था। वहीं किरोड़ी मीणा ने दौसा वासियों को कहा था कि मैं तुम्हारा वोट नहीं भीख मांगने आया हूं, वहीं बीजेपी उम्मीदवार जगमोहन मीणा ने मजीरे बजाकर वोट मांगे थे। इसके बावजूद भी किरोड़ी दौसा से भाजपा को जीत नहीं दिला पाये।
बता दें कि लोकसभा चुनाव में भी किरोड़ी लाल मीणा ने कन्हैयालाल मीणा को टिकट दिलाया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कन्हैयालाल यहां से चुनाव हार जाते है तो वो मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। लोकसभा चुनाव में मुरारी लाल मीणा ने कांग्रेस को 2 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। उसके बाद में किरोड़ी ने अपना इस्तीफा दे दिया था। लेकिन भजनलाल सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। लेकिन उपचुनाव में भाजपा ने किरोड़ी को मना लिया और उपचुनाव में उनके भाई जगमोहन को दौसा से टिकट दे दिया। उसके बाद किरोड़ी मीणा की भवानी जाग गई लेकिन भाई जगमोहन को चुनाव नहीं जीता पाये।
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