जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार हाते ही अशोक गहलोत पर आफतें आना शुरू हो चुकी है। इस बार उनके लिए सबसे बड़ी आफत खुद के ही ओएसडी लोकेश शर्मा बन चुके हैं। ओएसडी लोकश शर्मा ने गहलोत के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर मोर्चा खोल दिया है। आपको बता दें कि ये वो ही विशेष कार्य अधिकारी लोकेश शर्मा हैं जो पिछले पास साल से जो गहलोत के गुणगान कर रहे थे। अब अचानक से लोकेश शर्मा विपक्ष की भूमिका में आ चुके हैं और उनके लिए आफत बन चुके हैं।
राजस्थान में अशोक गहलोत अपनी ही सरकार को रिपीट करने वाले थे। उनको गांधी परिवार की तरफ से फ्री हेंड भी मिल चुका था। गहलोत सरकार के एंटी इनकंबेंसी भी नहीं थी। ओपिनियन पोल से लेकर एग्जिट पोल तक में गहलोत सरकार रिपीट कराने के लिए बोल रहे थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 3 दिसंबर को अशोक गहलोत की जादूगरी चली और ना कांग्रेस की सरकार रिपीट। राज्य में कांग्रेस पार्टी को सिर्फ 69 सीटें मिली। इस जबरदस्त हार का ठीकरा गहलोत के सिर फूटा। परिणाम आने तक गहलोत के करीबी भी उनके खिलाफ हो गए। सभी गहलोत को ही हार का कारण बताने लगे।
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चुनाव परिणम आने के बाद राजस्थान में कांग्रेस की हार की समीक्षा की जा रही थी। इसमें राजस्थान कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत सभी वरिष्ठ नेता इस हार का कारण भाजपा का ध्रुवीकरण और मोदी लहर को बताने में लगे थे। इसका मतलब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हार के लिए जिम्मेदार बताने से बचाने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन तभी ओएसडी लोकश शर्मा के बयानों से तहलका मचा गया। लोकेश शर्मा के खुलेआम विरोध कर दिया जिससें गहलोत के नेतृत्व पर सवाल उठ गए।
जिस समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की विफलता पर भाजपा बयानबाजी कर रही थी उसी समय गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा की टिप्पणियों ने पार्टी में बवाल मचा दिया। उन्होंने एक मात्र चेहरे, टिकट बंटवारे, फ्री हेंड की नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न खड़े कर दिए। शर्मा ने आरोप लगाया कि गहलोत आत्ममुग्दता में रहे और गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया। गंभीर मामलों पर भी उपेक्षा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजस्थान में वास्तव में रिवाज़ बदल सकती थी, परंतु अशोक गहलोत कभी कोई बदलाव नहीं चाहते थे। यह कांग्रेस की नहीं बल्कि अशोक गहलोत की हार थी।
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लोकेश शर्मा ने कहा कि ‘मैं परिणामों से आहत जरूर हूं, लेकिन अचंभित नहीं। क्योंकि कांग्रेस निःसंदेह रिवाज बदल सकती थी, लेकिन अशोक गहलोत बदलाव नहीं चाहते थे। यह कांग्रेस की नहीं बल्कि गहलोत की हार है। गहलोत के चेहरे पर, उनको फ्री हैंड देकर, उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और उनके अनुसार सीट पर वे खुद चुनाव लड़ रहे थे। न गहलोत का अनुभव चला, न जादू और हर बार की तरह कांग्रेस को उनकी योजनाओं के सहारे जीत नहीं मिली। ना ही अथाह पिंक प्रचार काम चला। 3 बार मुख्यमंत्री बनकर भी गहलोत ने पार्टी को फिर से हाशिये पर लाकर रख दिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी सिर्फ़ लिया ही लिया है, परंतु कभी अपने रहते हुए पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं करा पाए’। आपको बता दें कि लोकश शर्मा यह बयान जबरदस्त साबित हुआ और अशोक गहलोत पर उंगलियां उठना शुरू हो गई।
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