Bagru Print Jaipur : राजस्थान में एक से बढ़कर एक हस्तकलाएं मौजूद हैं। जयपुर में पुश्तैनी कारोबार इतने हैं कि जिनकी कोई गिनती नहीं है। हमने ये जिम्मा उठाया है कि आपको इन विलुप्त होती कलाओं से रूबरू करवाएंगे। बगरू प्रिंट का नाम आते ही जेहन में कलात्मक कपड़े नजर आते हैं। लकड़ी के ठप्पो से कपड़ों पर की गई कलाकारी को ही बगरू प्रिंट (Bagru Print Jaipur) नाम दिया गया है। बगरू जयपुर के पास अजमेर रोड़ पर स्थित एक कस्बा है जहां ये काम होता है। तो चलिए हजरात आपको राजस्थान की हस्तकलाएँ स्पेशल स्टोरी में आज रूबरू करवाते हैं जयपुर के मशहूर बगरू प्रिंट से जो कि सारी दुनिया में एक्सपोर्ट किया जाता है।
यह भी पढ़ें : जयपुर में लाख की चूड़ी कैसे बनती हैं, राजस्थान की हस्तकलाएँ स्पेशल स्टोरी
जयपुर से 30 किलोमीटर दूर अजमेर रोड़ पर एक कस्बा है बगरू। जैसा अनोखा इसका नाम है कुछ वैसा ही अनोखा है यहां का पुश्तैनी काम। जयपुर का यह छोटा सा कस्बा पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट छपाई शैली के लिए जाना जाता है। बगरू प्रिंट (Bagru Print History) में खतरनाक केमिकल्स की बजाय कुदरती रंगों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें काला रंग मुख्य होता है। अनावश्यक प्रिंटिंग से बचने के लिए लकड़ी के ठप्पों को कपड़े पर दबाकर छपाई की जाती है, जिसे दाबू तकनीक (Dabu Block Printing) कहा जाता हैं।
जयपुर की हस्तकलाओं और विलुप्त होती विरासत के बारे में और भी ज्यादा जानकारी के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़े।
पिछले 400 सालों से छीपा समुदाय ने इस कला को परवान चढ़ाया है। आज बगरू में 500 से भी ज्यादा परिवार इस हुनर के दम पर अपनी आजीविका चला रहे हैं। जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 15 हज़ार लोगों को रोज़ग़ार मिल पा रहा है। कुल मिलाकर जयपुर के पास का ये कस्बा इस उद्योग को सारी दुनिया तक पहुंचा रहा है। बगरू प्रिंट का कारोबार सात समंदर पार पहुंच चुका है। ऑनलाइन बिक्री भी जमकर हो रही है। बगरू हाथ ठप्पा छपाई दस्तकार संरक्षण एवं विकास समिति लगातार कामगारों के मुद्दे सरकार के सामने रखती रही है।
लेकिन पिछले कुछ सालों से यह कारोबार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। चूंकि बगरू प्रिंट का ज्यादातर बिजनेस विदेशों से जुड़ा हुआ है, इसलिए कोरोना काल में इसे काफी नुकसान झेलना पड़ा। यहां काम करने वाले कारीगर सरकार की विभिन्न योजनाओं से अनभिज्ञ हैं। अगर इन हुनरमंद कामगारों को MSME योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएं तो बगरू प्रिंट उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें : जयपुर में कुंदन ज्वेलरी कैसे बनती है, राजस्थान की हस्तकलाएँ स्पेशल स्टोरी
इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राजस्थान की भजनलाल सरकार (Bhajanlal Sarkar Rajasthan) लगातार ये कोशिश कर रही है कि किस तरह प्रदेश की ऐसी तमाम ऐतिहासिक और व्यापारिक धरोहरों को संजोया जा सके। बगरू प्रिंट उद्योग से जुड़े तमाम लोग उद्योग विभाग राजस्थान सरकार से संपर्क करके विभिन्न लाभकारी योजनाओं की ज़रूरी जानकारी तथा समुचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
टोंक। विगत तीन वर्षों से अपने शैक्षणिक नवाचारों से चर्चित राहोली के पीएमश्री राजकीय उच्च…
जयपुर। हाल ही में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के द्वारा दिए गए विवादित…
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऋषि गालव भाग द्वारा 30 मार्च, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष पर…
जयपुर। राष्ट्र सेविका समिति जयपुर विभाग का शुक्रवार को झोटवाड़ा में पथ संचलन निकाला। घोष…
— डॉ. योगेन्द्र सिंह नरूका इतिहासविज्ञ Rana Sanga News : जयपुर। टोंक के डिग्गी में…
Rajasthan News : जयपुर। राजस्थान जैन सभा, जयपुर द्वारा 12 से 25 वर्ष के युवाओं…