भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा में एक 'शोक संदेश' इस समय वायरल हाे रहा है। इसमें एक परिवार ने अपनी बेटी के स्वर्गवास की सूचना देते हुए 'पीहर की गोरनी' यानी मृत्यु भोज के निमंत्रण दिया है। समाज के लोगों को आमंत्रित करते हुए यह शोक संदेश गांव में बांटा गया तो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दरअसल, कार्ड में जिस युवती प्रिया जाट की मौत की सूचना दी गई है, वो असल में जीवित है। बेटी के जिंदा रहते, ऐसा शोक संदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।
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प्रियजनों की रजामंदी के बिना भागी लड़की
यह पूरा मामला भीलवाड़ा जिले के हमीरगढ़ थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव का है। नारायण लाल लाठी की पोती और भैरूलाल की बेटी प्रिया जाट लापता है। वह अपने प्रेमी के साथ घर से भागी है। प्रिया के परिजनों के अनुसार उनकी रजामंदी के बिना वह युवक के साथ घर से भागी है। बेटी के इसी कदम से नाराज परिजनों ने उसके 1 जून 2023 को स्वर्गवास की खबर के साथ 13 जून 2023 को सुबह 9 बजे पीहर की गोरनी यानी मृत्यु भोज का कार्यक्रम तय कर दिया।
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परिजनों को पहचानने से इनकार किया
यह कि रतनपुरा गांव की प्रिया जाट अपने परिजनों की मर्जी के खिलाफ अपनी पसंद के युवक के साथ घर से भागी थी। इस पर परिजनों ने हमीरगढ़ थाने में प्रिया की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने प्रिया को ढूंढ़कर परिजनों की मौजूदगी में उससे बात की। प्रिया ने पुलिस के सामने अपने परिजनों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया।
परिवार के लिए मर गई बेटी
पुलिस थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाने वाले परिजनों को बेटी से ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। लेकिन पहचानने से ही इनकार करने के बाद परिजनों ने वहीं पर कह दिया कि 'हमारी बेटी तो मर चुकी है'। इसके बाद उन्होंने शोक संदेश भी छपवा दिया। अब यह शोक संदेश जब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
ऐसे छपवाय शोक संदेश
सोशल मीडिया पर भीलवाड़ा के ही युवक आशीष जाट ने शोक संदेश का फोटो शेयर किया है। उसने अपनी पोस्ट में लिखा है कि रतन पूरा गांव में भैरूलाल लाठी की बेटी प्रिया जाट 18 की होते ही अपने बॉयफ़्रेंड के साथ भाग गई। थाने में अपने मां-बाप के लिए कहा कि 'मैं इनको जानती नहीं हूं' इसके बाद परिवार ने इसकी गोरनी की चिट्ठियां (शोक-संदेश) बांट दी। बहुत अच्छी पहल, ऐसी औलाद के लिए यही अच्छा है। उधर, प्रिया के छोटे भाई ने बताया कि 'मेरी बहन प्रेमी लड़के (प्रेमी लड़के का नाम नहीं दिया) के साथ चली गई थी। इससे माता-पिता बहुत आहत हुए। इसी को लेकर उन्होंने यह शोक पत्रिका छपवा कर मृत्यु भोज रख दिया है।'
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