मंगलवार का दिन था। शाम का वक्त था। अक्सर जयपुर के हनुमान मंदिरों में मंगलवार और शनिवार को भक्तगण विशेष दर्शनों के लिए जाते हैं। ऐसी ही एक शाम थी, 13 मई 2008 की। जब अधिकांश लोग अपने अपने घरों को जा रहे थे, तो कोई अपने इष्ट देव की पूजा करके निकल रहा था।
क्या हुआ था उस दिन
गर्मी का मौसम था। 13 मई की शाम। हां,अकसर गर्मी में लोग शाम के वक्त शॉपिंग पर निकलते हैं। सभी सड़कें चौक- चौराहे अच्छी खासी आवाजाही से व्यस्त थे। कहीं गाड़ी का हॉर्न, तो कहीं सब्जियों के ठेले लगे थे। अच्छी खासी चहल कदमी हो रही थी। इसी बीच अचानक जयपुर के माणक चौक हवा महल के आगे करीब 7:20 पर गुलाबी शहर दहल उठता है। किसी को कुछ समझ नहीं आया क्या हुआ है।
आखिर इससे पहले इस खूबसूरत शांत शहर ने ऐसा धमाका कभी नहीं सुना था। चारों और अफरा-तफरी मच गई। लोग समझ ही नहीं पा रहे थे आखिर क्या हुआ? चारों ओर चीख-पुकार मचने लगी।जांच में पाया गया धमाकों के लिए रखा गया बम साइकिल में था।
आतंकवादियों ने धमाके के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया था।धीरे-धीरे एक-एक करके जयपुर में धमाकों की आवाजें गूंजने लगी। जिसमें कई लोग मारे गए और बहुत से घायल हुए। इस घटना को अब 15 साल होने वाले हैं। लेकिन इसके दंश को आज भी जयपुर वासी नहीं भूल पाए हैं।
कुल 9 बम जयपुर शहर में फिट की गए। जिनमें से आठ ब्लास्ट हुए कई परिवार उजड़ गए फिर भी आरोपी बरी हो गए, ऐसा क्यों?
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