जयपुर। प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। विधानसभा चुनाव की रणभेरी भी बज चुकी हैं। भाजपा जहां केंद्र सरकार की योजनाओं तथा पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं वहीं कांग्रेस गहलोत सरकार की योजनाओं के दम पर सरकार रिपीट करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश में लगातार सीटें जीती हैं। 1998 से पार्टी ने अपनी धाक जमाई हुई हैं। हालाकीं विधायकों को कई बार तोड़कर कांग्रेस में शामिल भी कर लिया गया। उसके बावजूद भी बसपा सियासी मैदान में खड़ी रही।
बसपा ने पहली बार 1998 में 2 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। उसके बाद बसपा ने 2003 में फिर से अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। 2003 में बसपा के 2 प्रत्याशीयों ने जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचे। उसके बाद बसपा ने 2008 के विधानसभा के चुनाव में एक बार फिर से प्रत्याशी मैदान में उतारे और 6 सीट पर जीत दर्ज की बसपा ने हर साल जीत का आंकडा बढ़ाया, लेकिन पार्टी की जिते हुए विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। जिसके कारण बसपा को एक बड़ा झटका लगा।
बसपा ने विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। 2013 की बात करें तो जहा मोदी लहर में कांग्रेस के पास 21 ही सीटें थी वहां बसपा ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बसपा ने प्रत्याशियों की तलाश के साथ ही प्रत्याशियों की घौषणा भी कर दी हैं। बसपा ने इस बार साफ कर दिया हैं वह 2018 में जीते किसी प्रत्याशी को टिकट नहीं देने वाली हैं। बसपा की और से इस बार ठोक बजाकर टिकट का वितरण किया जाएगा। बसपा की सबसे मजबूत पकड पूर्वी राजस्थान में हैं। बसपा के विधायक यहा से विधानसभा पहुंचते हैं।
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