जोधपुर। सूर्यनगरी में बिपरजॉय तूफान और उसके बाद प्री मानसून और अब मानसून के कारण जमकर बारिश हो रही हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण शहर की सड़कें गढ्ढो में समा चुकीं हैं। जोधपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला हैं। सीएम के गृह जिले के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सड़क में गढ्ढा हैं या गढ्ढे में सड़क आमजन को यह ही समझ नहीं आता हैं। ऐसे में आम जन इन सड़कों पर हिचकोले खाने को मजबूर हैं। सड़क पर बने गढ्ढें आम जन के लिए परेशानी का सबब बन चुकें हैं। बीते कुछ दिनों से बारिश का दौर भी थम चुका हैं।
सीएम के शहर में नगर निगम हो या जेडीए हर कोई आंखे बंद कर के बैठा हैं। प्रशासन की ओर से इस और ध्यान देना भी जरूरी नहीं समझा जा रहा हैं। शहर की सड़कों की बात करें तो शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां दो फिट से ज्यादा गहरे गढ्ढे हैं। ऐसे में आमजन को आवाजाही में खासा परेशानीयों का समाना करना पड़ रहा हैं। वहीं कई इलाके तो ऐसे भी है जहां सड़क ही नदारद हैं। यानी सड़क के बजाय सिर्फ गढ्ढें ही नजर आते हैं। जब आमजन के द्वारा सड़कों के लिए स्थानीय पार्षद से कहा जाता हैं। तो पार्षद बजट नहीं होने का हवाला देते हुए अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में आमजन की सुनने वाला कोई नहीं हैं।
शहर ही नहीं बल्की शहर के बाहरी इलाकों के हाल भी बेहाल हैं। टूटी सड़कों की और खैर खबर लेने वाला भी कोई मौजूद नहीं हैं। शहर में टूटी सड़को को लेकर आमजन की और से कई बार आंदोलन किया गया हैं। सोए हुए प्रशासन को जगाने के लिए परेशान लोगों ने ढोल बजाकर आंदोलन किया, लेकिन उसके बावजूद भी प्रशासन कुंभकरण की नींद सो रहा हैं।
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