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बढ़ता साइबर क्राइम, राजस्थान पहुंचा 9वे स्थान पर: यौन शोषण चाइल्ड पॉर्नोग्राफी

महिलाओं के साथ ही नहीं, छोटे बच्चों के साथ भी, भारत सहित राजस्थान में यौन अपराध बढ़ते जा रहे हैं। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी, एब्यूजिंग कंटेंट, बुलिग, सेक्यूलर एब्यूजिंग, कंटेंट, रेप और गैंगरेप से जुड़े गंभीर साइबर अपराधों को रोकने के लिए बनाई गई केंद्रीय गृह मंत्रालय की अहम भूमिका फेल होती नजर आ रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थान, नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल पर 2020 से 2022 के बीच 2,911 शिकायतों में से सिर्फ दो पर  एफ आर आई दर्ज हुई।
देशभर में 3 साल में इस प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायतें 1.20 लाख दर्ज हुई है। इनमें भी मात्र 50 पर एफ आर आई दर्ज हुई।
 

क्या है कारण

इस प्रकार के संवेदनशील विषय पर गृह मंत्रालय ने पोर्टल में बेनामी श्रेणी को विकल्प के रूप में जोड़ा। जिससे कि पहचान को छुपाया जा सके। महिलाएं, बच्चे ऐसे अपराधों की शिकायत करने में संकोच करते हैं, झिझकते हैं। कहीं ना कहीं यही विकल्प अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया। यहां तक की पोर्टल में बेनामी ही नहीं, पहचान सहित शिकायतों में भी f.r.i. 1% से भी कम रही।

राजस्थान में साइबर क्राइम की 2020 में 816 शिकायतें हुई थी। उनमें भी सिर्फ दो में ही f.r.i. दर्ज हुई। वही आश्चर्यचकित चौंकाने वाला डाटा 2022 मे प्राप्त हुआ जहां 1173 शिकायतों में जीरो f.r.i. दर्ज हुई। जबकि आए दिन हम अखबारों की सुर्खियों में यही खबर पढ़ते आ रहे हैं।

साइबर क्राइम को रोकने के लिए सरकार के इंतजाम काफी नजर नहीं आते। वक्त रहते इस संवेदनशील विषय पर गृह मंत्रालय को संज्ञान लेना चाहिए।साइबर क्राइम  जिसमें चाइल्ड पॉर्नोग्राफी, यौन शोषण और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। उनकी फोटो और वीडियो जिस प्रकार से सोशल मीडिया पर वायरल किए जाते हैं। वह बताते हैं कि साइबर अपराध में दिनोंदिन बढ़ोतरी होती जा रही है। जो चिंता का विषय है।

साइबर क्राइम की शिकायतों में सर्वाधिक शिकायत करने वालों में पश्चिमी बंगाल 284 505 तमिलनाडु 5635 उत्तर प्रदेश 3825 महाराष्ट्र 3304 इसकी अलावा दिल्ली में 3228 शिकायतें 2020 से 2022 में दर्ज की गई।वहीं देश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में 62347 शिकायतें दर्ज हुई लेकिन f.r.i. 41 में ही दर्ज हुई मतलब साइबर क्राइम में 181 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
 

क्या हो समाधान
सच तो यह है कि भारत में साइबर सेल की क्षमता का अभाव है ।सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और विशेषज्ञता के अभाव से पुलिस प्रशासन जूझ रहा है। समाधान स्वरूप सबसे पहले हमें साइबर सेल नियुक्त करने होंगे। साथ ही महिलाओं और बच्चों को भी जागरूक करते हुए। उन्हें पहचान छुपाकर अपनी शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। जिससे उन्हें समय पर न्याय मिले।
 

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