राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान जोधपुर में ओसियां सीट पर इस बार सीधा मुकाबला देखा जा रहा है। इस सीट पर पूर्व संसदीय सचिव भैराराम चौधरी और कांग्रेस की दिव्या मदेरणा की बीच सीधी टक्कर है। ये दोनों ही प्रत्याशी जनता के बीच जाकर कुछ विशेष करते नजर आ रहे हैं। जोधपुर जिले की दूसरी सबसे हॉट सीट ओसियां में इस बार चुनाव बेहद रोचक होने जा रहा है। यहां पर पहले ही दिन से भाजपा के भैराराम चौधरी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। ऐसे में कांग्रेस की दिव्या मदेरणा ने जाटों पर ध्यान केंद्रित किया है। वो जाटों को अपने पक्ष में लामबंद करने में जुटी हुई हैं। अपने प्रचार के दौरान कहीं दिव्या पकौड़े तलती नजर आ रहीं हैं तो कहीं भैराराम भी वोट के लिए झोली फैलाते दिख रहे हैं। अपको बता दें कि 2008 में परिसीमन के बाद यहां मदेरणा परिवार ने वापसी की थी। हालांकि, 2008 में यहां त्रिकोणीय मुकाबला था लेकिन इस बार मामला बदल गया है।
ओसियां क्षेत्र के गांवों में पेयजल एक बड़ा मुद्दा है। महिपाल मदेरणा ने जल संसाधन मंत्री रहने के दौरान जो योजना बनाई, उसे दिव्या मदेरणा ने शुरू करवाने का काम किया है। हालांकि अभी भी विकास की जरूरत है। कई गावों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ओसियां कस्बे की आबादी भी बढ़ रही है, ऐसे में कस्बे के समन्वित विकास को लेकर प्लान की आवश्यकता है।
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दिव्या मदेरणा की राजनीतिक करने की आक्रामक शैली है। मदेरणा परिवार की 60 दशक की राजनीतिक विरासत का फायदा दिव्या को मिला है। इसके साथ ही वो जाटों में उभरती हुई नेता भी हैं।
दिव्या पार विधायक बनने के बाद जातिय भेदभाव को लेकर आरोप लग चुके हैं। कहने को भले ही 36 कौम का साथ देने की बात होती है, लेकिन जाटों को ज्यादा तरजीह से दूसरों में नाराजगी है।
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भैराराम का यह तीसरा चुनाव है। उनके पास एक बार सरकार में संसदीय सचिव रहने का अनुभव है। इसबार उनके साथ राजपूत हैं। वो जाटों में पकड़ के अलावा अन्य परंपरागत भाजपाई वोटों का भरोसा रखते हैं।
उनके पास पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठ भूमि नहीं है और राजपूतों के समर्थन से दूरी जाट दूरी बना सकते हैं।
ओसिंया विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 65 हजार 153 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 39 हजार 857 पुरूष, 1 लाख 25 हजार 295 महिलाएं व सिर्फ 1 थर्ड जेंडर मतदाता।
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