राजस्थान में लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग की जा रही है। इसके लिए सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. रामलुभाया की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी 17 मार्च को होने वाली सदन की कार्यवाही में नए जिलों को लेकर घोषणा कर सकती थी। लेकिन सरकार ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
गहलोत सरकार ने फिलहाल इस पर ब्रेक लगा दिया है। रामलुभाया कमेटी इन दिनों सरकार को रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रही थी कि अचानक कमेटी का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब यह कमेटी रिपोर्ट पेश नहीं करेगी। ऐसे में अब नए जिले बनने की आशा कम ही नजर आ रही है।
सदन की कार्यवाही होने से पहले बढ़ाया कार्यकाल
राज्यभर से नए जिलों की मांग के लिए सदन में 17 मार्च को कार्यवाही होने वाली थी। सभी इस उम्मीद से इंतजार में थे कि 17 मार्च को नए जिले बनाने के पक्ष में फैसला आएगा। लेकिन सीएम गहलोत ने रामलुभाया कमेटी का कार्यकाल 6 माह के लिए बढ़ा दिया है। मार्च में विधानसभा सत्र खत्म होने वाला है और उसके बाद विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में कोई गारंटी नही है कि कमेटी 6 माह बाद रिपोर्ट पेश करे और इस पर फैसला आए।
ये बन सकते हैं नए जिले
जनता के साथ-साथ कई विधायक और मंत्री भी प्रदेश में नए जिले बनाने की मांग करे हैं। इनमें ब्यावर, बालोतरा, भिवाड़ी, नीम का थाना, कुचामन सिटी, सुजानगढ और फलौदी को जिला बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा चितौड़, सीकर और बाड़मेर को संभाग बनाए जाने की भी मांग है। अगर ऐसा होता है तो राज्य में कुल 10 संभाग और 40 जिले होंगे। साथ ही चुनाव से पहले अगर नए जिले बनाने की घोषणा होती है तो उसका फायदा मौजूदा सरकार को चुनाव में हो सकता है।
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