मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट आपसी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। गहलोत ने पहली बार खुलकर अपनी राय पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के अनशन पर रखी। उन्होनें मामले में आलाकमान को जवाब कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के जरिये भेजा है।
जिसमें पायलट पर गुमराह करने का भी आरोप लगा है। पायलट ने अशोक गहलोत पर वसुंधरा सरकार के समय में 45 हजार करोड़ के खान घोटाले और अन्य भ्रष्टाचार की जांच नहीं कराने की बात कही थी। जिसे लेकर 11 अप्रैल को अनशन भी किया गया था। जिसपर गहलोत ने अब तक चुप्पी साध रखी थी।
पायलट कर रहे जनता को गुमराह
गहलोत ने कहा है कि पायलट अनशन पर बैठे, लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया यह समझ से परे है। वे जिन मुद्दों को उठा रहे हैं उनपर तो सरकार कार्रवाई कर चुकी है। पायलट या तो इस बारे में जानकारी नहीं रखते या वो जनता को इस बात से गुमराह कर रहे हैं। वे जब डेढ़ साल तक इस सरकार का हिस्सा थे ये मुद्दे नहीं उठाए और चुप रहे ऐसा क्यों।
कई फैसले निरस्त किए
वसुंधरा सरकार के कई फैसलों को भी निरस्त किया गया। 2009 में सरकार के कार्यों की जांच के लिए माथुर आयोग बनाया गया। जिसे हाई कोर्ट ने इसे भंग किया। सरकार के 2013 से 18 के कार्यकाल आखिरी माह में लिए गए फैसलों की समीक्षा के लिए भी मंत्रियों ने उपसमिति बनाई थी। समीक्षा के बाद इसमें से कई फैसलों को निरस्त किया गया था। ऐसे ही कई और भी मामलों को लेकर पायलट गहलोत पर निशाना साध रहे हैं।
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