जयपुुर। राजस्थान के गुर्जर समुदाय के लोगों ने इस बार कांग्रेस से आर पार की ठान ली है। गुर्जर समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में घोषित नहीं किया जाता है तो समाज के लोग कांग्रेस को वोट नहीं देंगे। गुर्जर समाज के इस ऐलान के बाद कांग्रेस सकते में है। दरअसल सवाईमाधोपुर में भगवान देवनारायण मंदिर के वार्षिकोत्सव समारोह में पहुंचे विधायक और मुख्यमंत्री सलाहकार दानिश अबरार को पायलट समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। सर्मथकों ने गद्दार और मुर्दाबाद के नारे लगाए।
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समारोह में विधायक के साथ जो कुछ हुआ उसके बाद गहलोत सरकार की चिंता बढा दी है। दरअसल विधायक दानिश अबरार, गहलोत खेमे में होने के कारण पायलट समर्थक उनके खिलाफ है। और उन्हें समाज की इसी नाराजगी को झेलना पड़ा। गुर्जर समाज ने साफ कर दिया जो सचिन पायलट के साथ नही वो हमारा नही। ऐसे में अब कांग्रेस दो धड़ो में बंटती नजर आ रही है। जिसका असर विधानसभा चुनाव में भी पड़ेगा।
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बहरहाल राजस्थान में गुर्जर वोट की अहमियत बढ़ गई है। विधानसभा चुनाव देख दोनों पार्टियों की नजर गुर्जर समुदाय के मतदाताओं पर है। राजस्थान की 30-35 सीटों पर गुर्जर जाति का प्रभाव माना जाता है। देखा जाए तो गुर्जर समुदाय परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ माना जाता है,लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट की वजह से गुर्जर समुदाय का रुख कांग्रेस पार्टी की तरफ हो गया था। गुर्जर समुदाय ने कांग्रेस पार्टी को वोट सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की आस में दिया था, लेकिन कांग्रेस ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया इससे नाराज गुर्जर समुदाय पायलट के साथ है।
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राजस्थान के 12 जिलों में गुर्जर समाज का प्रभाव देखने को मिलता है जिसमे भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, जयपुर, टोंक, दौसा, कोटा, भीलवाड़ा, बूंदी, अजमेर और झुंझुनू जिलों को गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। बीजेपी कांग्रेस दोनो ही पार्टी गुर्जर समाज की हितेशी बनने की होड में दिखाई भी दी,जहां सीए गहलोत ने भगवान देवनारायण की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर समाज खुश करने का प्रयास किया। वही पीएम नरेंद्र मोदी भगवान देवनारायण की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में समाज के बीच पहुंचे थे। अब देखने वाली बात होगी की विधानसभा चुनाव 2023 में ऊंट किस करवट बैठता है। किसके खाते में गुर्जर समाज वोट करता है।
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