Categories: स्थानीय

राजस्थान चुनाव में किसका समीकरण बिगाड़ेंगे हनुमान बेनीवाल, देखें रिपोर्ट

राजस्थान में राज्य सरकार चुनी जा रही है। इसको लेकर प्रत्येक दल ने अपने-अपने समीकरणों को फिनिशिंग टच दिया है ताकि चुनावी नैया पार कर सके। एक तरफ सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी है। इसको लेकर बड़े नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां और रोड-शो के साथ ही वादों की बौछारें की हैं। वहीं, छोटे दलों द्वारा वोटर्स को अपने पाले में करने की जबरदस्त कवायद की गई जिस वजह से उनका रोल काफी अहम हो गया।

 

राजस्थान में 3 छोटी पार्टियां हैं जो बीजेपी और कांग्रेस का गणित बिगाड़ने का दम रखती हैं। इन जननायक जनता पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और आजाद समाज पार्टी शामिल हैं। हालांकि, शेखावाटी क्षेत्र में हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी का गठबंधन दोनों ही बड़े दलों की सांसे फुला रहा है। वहीं, जेजेपी भी जाट वोट में सेंध लगाकर मामला खराब कर सती है।

 

हनुमान ने 2018 में ऐसे खेला था दांव

आपको बता दें कि 2018 के राजस्थान चुनाव में तब की सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के बीच तगड़ी टक्कर थी। सीटों के हिसाब से कांग्रेस भले ही बीजेपी पर 26 सीट की लीड के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी लेकिन वोट शेयर के लिहाज से दोनों दलों के बीच अंतर आधे फीसदी वोट का ही था। तब कांग्रेस को 39.8 फीसदी वोट और 99 सीटों पर जीत मिली थी। बीजेपी का वोट शेयर 39.3 फीसदी वोट रहा था और पार्टी को 73 सीटें मिली थीं।

यह भी पढ़ें: हनुमान-आजाद के बड़े चुनावी वादे, जारी हुआ RLP-ASP प्रतिज्ञा पत्र

 

हनुमान बेनीवाल ने तब चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के बाद अक्टूबर महीने में पार्टी बनाने का ऐलान किया था। नई-नवेली आरएलपी तब 2.3 फीसदी वोट शेयर के साथ तीन सीटें जीतने में सफल रही थी। कांग्रेस अगर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी 101 सीट के जादुई आंकड़े से दो सीट कम पर थम गई तो इसमें बेनीवाल की पार्टी का बड़ा रोल माना गया। क्लोज फाइट वाली सीटों के परिणाम पर नजर डालें तो तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाती है।

 

हनुमान ऐसे बदल सकते हैं समीकरण

राजस्थान विधानसभा की 200 में से 20 सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का अंतर एक से 5000 वोट के बीच का था। 9 सीटों हार-जीत का फासला 1000 से भी कम का वोट का रहा। इनमें से करीब दर्जन भर सीटें ऐसी थीं जहां बेनीवाल की पार्टी को हार-जीत के अंतर से अधिक वोट मिले थे। वैसा होता तो ऐसा होता, ऐसा होता तो वैसा होता जैसी बातों का कोई खास मतलब नहीं होता लेकिन फिर भी, अगर बेनीवाल की पार्टी नहीं होती तो क्लोज फाइट वाली इन सीटों पर चुनावी ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता था।

यह भी पढ़ें: Diya Kumari ने बता दी कांग्रेस की सीटों की संख्या! CM फेस पर कही बड़ी बात

 

पिछले चुनाव की तस्वीर देख कहा ये भी जा रहा है कि छोटी पार्टियां किंगमेकर बनें ना बनें, सूबे में सत्ता के समीकरण बदल सकती हैं. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि बेनीवाल की पार्टी आरएलपी और चंद्रशेखर की एएसपी गठबंधन ने सौ से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जिनमें से करीब पांच दर्जन सीटें ऐसी हैं जहां जाट-दलित समीकरण निर्णायक साबित हो सकता है। जेजेपी ने भी हरियाणा की सीमा से सटे इलाकों की करीब दो दर्जन सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।

 

बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख पार्टियां जाट मतदाताओं को साधने की जुगत में जुटी हैं। ऐसे में आरएलपी और एएसपी गठबंधन के साथ ही जेजेपी की एंट्री ने जाट वोट की लड़ाई को बहुकोणीय बना दिया है। आरएलपी और जेजेपी जैसी पार्टियों ने बीजेपी-कांग्रेस के बागियों पर अधिक दांव लगाया है। कहा तो ये भी जा रहा है कि बेनीवाल की पार्टी के गठबंधन और जेजेपी कितनी सीटें जीत पाते हैं? इससे अधिक नजर इस बात पर है कि ये कितनी सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस का खेल बिगाड़ते हैं। दोनों ही दलों को कुल मिलाकर छह से सात फीसदी वोट भी मिल गए तो कांग्रेस-बीजेपी में से कोई भी पार्टी राजस्थान की सत्ता के नजदीक जा सकती है।

यह भी पढ़ें: फलौदी सट्टा बाजार में कैसे लगता है चुनावी हार-जीत का आकलन, समझिए

 

3 पार्टियों का प्रमुख प्रभाव क्षेत्र

हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी का जाटलैंड में अच्छा प्रभाव है. नागौर, सीकर, झुंझुनू, भरतपुर समेत करीब दर्जनभर जिलों में जाट मतदाताओं की बहुलता है। बेनीवाल नागौर से सांसद हैं और जाटलैंड की ही खींवसर सीट से चुनाव मैदान में हैं। जेजेपी की नजर भी जाटलैंड पर ही है। जाटलैंड में दोनों जाट पार्टियों के बीच जाट वोट की लड़ाई है तो वहीं दलित बाहुल्य मारवाड़ इलाके की सीटों पर एएसपी की नजर है।

 

ये हैं प्रमुख चेहरे

नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल आरएलपी के प्रमुख और पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा है। बेनीवाल की ही पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस के आधा दर्जन से अधिक बागियों को टिकट दिया है। बीजेपी एससी मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बीएल भाटी भी आरएलपी के टिकट पर जायल सीट से मैदान में हैं तो वहीं कपासन से उम्मीदवार आनंदी राम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भी सदस्य रह चुके हैं। राजस्थान में सियासी जमीन तलाश रही जेजेपी के लिए पार्टी प्रमुख दुष्यंत चौटाला प्रमुख चेहरा हैं तो वहीं एएसपी की ओर से चंद्रशेखर।

 

ऐसा रहा पिछला परिणाम

पिछले चुनाव में आरएलपी को 2.3 फीसदी वोट शेयर के साथ तीन सीटों पर जीत मिली थी। जेजेपी और एएसपी के लिए राजस्थान की चुनावी राजनीति में ये डेब्यू है। लेकिन बार यह हनुमान बेनीवाल जबरदस्त गेम कर सकत हैं जो चुनाव परिणामों में देखने को मिलेगा।

Anil Jangid

Anil Jangid डिजिटल कंटेट क्रिएटर के तौर पर 13 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। 10 साल से ज्यादा समय डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर राजस्थान पत्रिका, 3 साल से ज्यादा cardekho.com में दे चुके हैं। अब Morningnewsindia.com और Morningnewsindia.in के लिए डिजिटल विभाग संभाल रहे हैं।

Recent Posts

The Secret Behind Saumic Craft Success in Helping Artisans!

India is known for handmade crafts. Our artisans make beautiful items with their hands, keeping…

13 घंटे ago

Saumic Craft: Helping India to Start ₹0 Investment Businesses

In today’s time, everyone wants to do their own business. But the biggest problem is…

13 घंटे ago

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर रखे अपने दिल के स्वास्थ्य का ख्याल

World Health Day : विश्व स्वास्थ्य दिवस हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाता है…

14 घंटे ago

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सराहे पीएमश्री स्कूल राहोली के शैक्षणिक नवाचार

टोंक। विगत तीन वर्षों से अपने शैक्षणिक नवाचारों से चर्चित राहोली के पीएमश्री राजकीय उच्च…

3 दिन ago

क्षत्रिय समाज की बड़े आंदोलन की तैयारी: ठाकुर शिवराज सिंह शक्तावत

जयपुर। हाल ही में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के द्वारा दिए गए विवादित…

5 दिन ago

नववर्ष पर होगा विराट पथ संचलन

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऋषि गालव भाग द्वारा 30 मार्च, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष पर…

1 सप्ताह ago