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राजस्थान में गर्मी से मरने वाले लोगों को मिलेगा मुआवजा, जानें इसकी पूरी प्रकिया

Heat Wave Deaths Compensation Rajasthan: राजस्थान में भीषण गर्मी के तांडव ने कई लोगों की जिदंगी लीन ली है और इस मौतों को लेकर अब राजनीति होना भी शुरू हो गया है। कई शहरों का अधिकतम तापमान 50 डिग्री से ऊपर पहुंच गया हैं और इसके कारण लोगों की मौत की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए भजनलाल सरकार को लू के कारण मरने वाले लोगों के आश्रितों को समुचित मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

अब तक 50 से ज्यादा मौते

आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 60 से ल्यादा लोगों की मौत लू लगने से हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ो में मरने वालों की संख्या बहुत कम है। लेकिन कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भजनलाल सरकार मरने वालों की संख्या को छूपाने का काम कर रही है।

राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा भीषण गर्मी और हीट वेव के प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही भाजपा सरकार अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मृतकों को मुआवजा देने से बचने के लिए मौत के आंकड़े छिपाने का पाप कर रही है।

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SMS अस्पताल से चौंकाने वाली सूचना है, जहां हीट वेव से मौत के बाद करीब 40 अज्ञात लोगों के शव मोर्चरी में हैं, हर दिन करीब 20-25 अज्ञात लोगों के शव मोर्चरी में आ रहे हैं। लेकिन सरकार मुआवजा देने से बचने के लिए मौत के अलग-अलग कारण बताकर 3 दिन के भीतर पोस्टमार्टम करके मामलों को निपटा रही है।

जबकि अज्ञात शव की शिनाख़्त, पुलिस की कार्रवाई, परिवार को ढूंढने और समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया में करीब 7 दिन लग जाते हैं, जिसके पश्चात डेड बॉडी को डिस्पोज किया जाता है।


 

ये आंकड़े सिर्फ SMS अस्पताल के हैं, पूरे प्रदेश के हालात भयावह एवं चिंताजनक है। सरकार सिर्फ 5 लोगों की हीट वेव से मौत बता रही है, जबकि सच्चाई ये है कि प्रदेश में भयंकर गर्मी और हीट वेव से मौतों का आंकड़ा बेहद डरावना है।

हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के संबंध में स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि राजस्थान जलवायु परिवर्तन परियोजना के तहत तैयार ‘ग्रीष्मकालीन कार्ययोजना’ के प्रभावी इम्प्लीमेंटेशन के लिए तत्काल कदम उठााए जाएं।

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राजस्थान उच्च न्यायालय ने भीषण गर्मी का स्वतः संज्ञान लिया और केंद्र तथा राज्य सरकारों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने को कहा।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड ने हीट स्ट्रोक के कारण होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उपाय करने के निर्देश दिए हैं। हीट वेव की स्थिति के बारे में सचेत करने के लिए एफएम, रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल ऐप, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, समाचार पत्र आदि के माध्यम से अलर्ट जारी करें। हीटवेव के कारण जान गंवाने वाले पीड़ितों के आश्रितों को उचित मुआवजा दिया जाए।

Narendra Singh

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