Jaipur Jama Masjid: गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) को यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज सिटी (UNESCO World Heritage City) का खिताब यूंही नहीं मिला है। यहां एक से बढ़कर एक इमारतें बनी हुई है। जामा मस्जिद का नाम आते ही दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद की तस्वीर सामने आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जयपुर में भी एक सालों पुरानी जामा मस्जिद है। जी हां, जयपुर की जामा मस्जिद का मुस्लिम समाज में अलग ही मुकाम है। 160 साल पहले जयपुर की जामा मस्जिद (JAMA Masjid) को तामीर किया गया था। जौहरी बाजार में बनी हुई Jaipur Jama Masjid सैलानियों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। जुमे की नमाज के दौरान यहां पर काफी भीड़ रहती है। तो चलिए इस शुक्रवार की नमाज Jaipur Jama Masjid में अदा करें और जानिए इसका सालों पुराना इतिहास।
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Jaipur Jama Masjid में जुमे की नमाज़ के दौरान गंगा जमुनी तहज़ीब का संगम देखने को मिलता है। जब जौहरी बाजार के कारोबारी नमाजियों को वजू करने के लिए पानी और बिछाने के लिए चादर मुहैया कराते हैं। रमजान आने को है, इस बार जयपुर में रमजान के महीने में जामा मस्जिद में भारी भीड़ होने वाली है। पूरे राजस्थान ऐसी कोई दूसरी मस्जिद नहीं है जहां एक साथ इतने नमाज़ी नमाज़ अदा करते हो।
रमजान के आखिरी जुमे को अलविदा जुमा कहा जाता है। आखिरी शुक्रवार को Jaipur Jama Masjid में 5 से 7 लाख तक लोग एक साथ अलविदा जुमा की नमाज़ में शामिल होते हैं। हालांकि कोरोना काल में यह 160 साल पुरानी प्रथा टूट गई थी जब 2020 के जमातुल विदा में Jaipur Jama Masjid में महज 5 लोगों ने जुमे की नमाज पढ़ी थी। बीच बाजार में मस्जिद होने से पर्यटक भी इसे देखने पर फोटो क्लिक जरूर करते हैं।
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Jaipur Jamaमस्जिद कमेटी के सदर नईम कुरेशी बताते है कि 1860 के करीब जामा मस्जिद वजूद में आई थी। उस समय सौदागर शम्सी खानदान की एक महिला रोशन बेग़म ने 22 हज़ार रुपये मस्जिद के लिए दान में दिये थे। उन पैसों से जौहरी बाजार की दुकानों के ऊपर की जगह खरीद कर मस्जिद तामीर की गई थी। उस दौरान न तो बरामदे थे और न हो जौहरी बाजार से ऊपर जाने का रास्ता बना हुआ था। तब लोग जुमा की नमाज में लकड़ी के फट्टे लगाकर ऊपर चढ़ा करते थे। इस बार रमजान का आखिरी जुमा (Jamat ul Vida 2024) 5 अप्रैल 2024 को होगा।
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