khajoor ki kheti: राजस्थान में खेती करने के लिए बहुत ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है और रेगिस्तान जैसे इलाकों में खेती करना बहुत ही मुश्किल काम है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी खेती के बारे में बताने जा रहे है जिसको करने से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। पाली जिले के पास एक रिटायर्ड आईएए ने ‘टिश्यू कल्चर टेक्नोलॉजी’ से खजूर की खेती करने सबको हैरान किया है।
खजूर के पेड़ को तैयार होने में थोड़ा समय लगता है और उत्तम किस्म की खजूरों की मार्केट में बहुत ज्यादा मांग है। किसानों की आय दुगनी करने में भी यह बहुत अच्छी है। इस पौधे की कीमत 3 से हजार रुपये है। पहले 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती थी, वहीं अब 75 प्रतिशत कर दी गई है।
एक खजूर का पेड़ 3 से 5 वर्ष बाद तैयार होता है और फल देना शुरू कर देता है। अगर इन पेड़ों की देखभाल अच्छे से हो तो लगभग 40 साल तक यह अच्छे फल देता है। खजूर की खेती जैसलमेर और बाड़मेर के क्षेत्रों में तेजी से होने लगी है।
खजूर को मंडी में बिकने के लिए भेजा जाता है तो 50 से 100 रुपये किलो के भाव पर बिकते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा मांग इनकी विदेशों में होती है और इसी वजह से अच्छा पैसा मिलता है। मुस्लिम देशों में खजूर की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है।
पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में खजूर के पौधों को लगाने में थोड़ी परेशानी होती है लेकिन अन्य इलाकों में इसकी खेती आसानी से हो जाती है। एक बीघा जमीन में 20 से 25 खजूर के पौधे लगाए जा सकते है और बड़े होने पर खजूर की खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
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