Maha Shivratri 2024: इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 8 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदुओं की आस्था का यह पर्व हर साल बड़े धूम-धाम से सेलिब्रेट किया जाता हैं। इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विधि-विधान से की जाती हैं। दुनियाभर के शिवभक्त इस दिन भोले बाबा को अपने-अपने तरीके से खुश करने का प्रयास करते हैं। दुनियाभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ जमा होती हैं। यहां हम राजस्थान के शिवाड़ स्तिथ शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं –
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़ में स्तिथ ‘घुश्मेश्वर महादेव’ मंदिर हैं। शिव महापुराण कोटि रूद्र संहिता के अध्याय 32-33 के अनुसार घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवालय (जिसे अब शिवाड़ कहा जाता हैं) में स्थित है। घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग अधिकांश समय जलमग्न रहता हैं, जिसकी वजह से यह अदृश्य रहता है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है तथा प्राणी सब पापों से मुक्त होकर सांसारिक सुखों को भोग कर मोक्ष को पाता है।
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सदियों पुरानी कहानी के मुताबिक ‘श्वेत धवल पाषाण देवगिरि पर्वत के पास सुधर्मा नामक धर्मपरायण भारद्धाज गोत्रीय ब्रहांमण रहा करते थे। उनकी पत्नी का नाम ‘सुदेहा’ था। सुधर्मा से सुदेहा संतान सुख से वंचित रही। ऐसे में उसे पड़ोसियों के व्यंग बाण सुनने को मिलते, जिससे वह काफी परेशान हो चुकी थी। पति का वंश न खत्म हो इसलिए सुदेहा ने अपनी छोटी बहन घुश्मा का विवाह सुधर्मा के साथ करवा दिया। घुश्मा भगवान भोलेनाथ की अनन्य भक्त थी।
घुश्मा प्रतिदिन एक सौ एक पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन-अर्चना करती थी। साथ ही उनका विसर्जन समीप के सरोवर में कर देती थी। प्रभु की कृपा से घुश्मा ने एक पुत्र को जन्म दिया तो सुदेहा काफी खुश थी। लेकिन जब घुश्मा का पुत्र बड़ा हुआ और उसका विवाह भी हो गया, तो सुदेहा को लगने लगा कि सुधर्मा का उसके प्रति प्रेम कम हो रहा हैं। पुत्र के विवाह के उपरांत ईर्ष्या के चलते सुदेहा ने घुश्मा के पुत्र की हत्या कर दी और शव को तालाब मे फेंक दिया।
अगली सुबह घुश्मा के मृतक पुत्र की पत्नी ने अपने पति की शय्या को रक्त रंजित पाया तो विलाप करने लगी। उसने अपनी दोनों सासों को सूचना दी। सूचना पाते ही विमाता सुदेहा जोर जोर से चीत्कार कर रोने लगी। वहीं, घुश्मा अपने प्रतिदिन के नियमानुसार शिव पूजा में लीन थी। वह निर्विकार भाव से अपने आराध्य को श्रृद्धा सुमन समर्पित कर रही थी। घुश्मा ने सदैव की भांति पार्थिव शिवलिंगों का विसर्जन सरोवर में किया और भगवान शंकर की स्तुति भी की।
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जब घुश्मा शंकर स्तुति कर रही थी, तो उसे पीछे से मां-मां की आवाज सुनाई दी। उसने मुड़कर देखा तो वह उसके प्रिय पुत्र की आवाज थी। यह वही पुत्र था, जिसे मृत मानकर पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था। विस्मित घुश्मा ने उसे शिव इच्छा-शिव लीला मानकर भोले शंकर का स्मरण किया। इसके बाद आकाशवाणी हुई और जिसमें सुना गया ‘घुश्मा तेरी सौत सुदेहा दुष्टा है उसने तेरे पुत्र को मारा है। मैं उसका अभी विनाश करता हूं।’
“प्रभु मेरी बहन को मत मारो, उसकी बुद्धि निर्मल कर दो। आपके दर्शन मात्र से पातक नहीं ठहरता, आपका दर्शन करके उसके पाप भस्म हो जाएं”।
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