Rajasthan News Hindi: राजस्थान हाई कोर्ट ने एक मामले में द्विविवाह को अपराध मानने से इंकार कर दिया है! दरअसल, कोर्ट के सामने एक विवाहित महिला ने केस दायर किया, जिसमें उसने अपने पति पर उसे छोड़कर किसी दूसरी महिला के साथ बीते 20 साल से पत्नी की तरह रहने का आरोप लगाया है। इस मामले में उस महिला ने कोर्ट से इंसाफ की गुहार लगाई। इस मामले में कोर्ट ने भी संज्ञान लिया और सुनवाई के बाद इस पूरे केस को ही रद्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि, द्विविवाह (दो शादी) का अपराध तब तक दर्ज नहीं किया जा सकता, जब तक दूसरी महिला के साथ रह रहा शादीशुदा मर्द उससे कानूनन और रीति-रिवाज से विवाह न कर लें। पूरे मामले में यह टिप्पणी जस्टिस कुलदीप माथुर ने की। उन्होंने IPC धारा 494 के तहत इसे सजा योग्य अपराध नहीं माना। जज ने कहा शादीशुदा व्यक्ति किसी और के साथ रह रहा है, वह द्विविवाह का अपराध नहीं होता, जब तक कि वह दूसरी शादी न कर लें।
याचिकाकर्ता पर उसकी पत्नी ने द्विविवाह, क्रूरता और अन्य कई तरह के आरोप लगाए थे। जिसके बाद शख्स ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उस शख्स के वकील ने कोर्ट ने दलील दी कि “महिला की तरफ से कथित अपराध के 20 साल बाद शिकायत की गई है, लेकिन उसने यह आरोप नहीं लगाया है कि उसके पति ने दूसरी महिला के साथ जरूरी धार्मिक रीतियों के साथ विवाह कर लिया है।’ केस दायर करने वाली महिला ने भी इस बात को स्वीकार किया।
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वहीं, दूसरी तरफ पत्नी के वकील ने पति के दावे को ख़ारिज करते हुए कहा कि ‘चलो मान लिया जाए उसका पति दूसरी महिला के साथ नाता प्रथा में रह रहा था, वह द्विविवाह का का दोषी है।’ हालांकि पूरे मामले पर कोर्ट ने सबूतों के अभाव में ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक केस को रद्द करने का आदेश दे दिया।
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