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Mayad Bhasha Rajasthani: मायड़ भाषा में शायरी, मिसरी सी मीठी लगेगी, अभी भेजे

Mayad Bhasha Rajasthani: राम राम सा, खम्मा घणी। आज 21 फरवरी है, इस दिन विश्व मायड़ भाषा दिवस मनाया जाता है। अब आप सोचोगे कि ये मायड़ भाषा क्या बला है। तो जी मायड़ यानि राजस्थान की भाषा। वही राजस्थानी भाषा जिसे आज पूरी दुनिया में लगभग 12 करोड़ लोग समझते और बोलते हैं। हालांकि हम राजस्थानी खुद आजकल इंग्लिश में गिटर पिटर करने लग गए हैं। लेकिन जो मजा मायड़ भाषा में है वो और कहां। मीसरी सी मीठी बोली है राजस्थान की जिसे आमतौर पर मारवाड़ी जुबान भी कहा जाता है। तो चलिए मायड़ भाषा में (Mayad Bhasha Rajasthani) शायरी का मजा लेते हैं। ताकि मायड़ भाषा दिवस के दिन तो कम से कम राजस्थानी भाषा की बात आम आदमी तक पहुंच सके।

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म्हारी मायड़ भाषा री शायरी सुणो जी

1
जीमो बाजरे री रोटी
और सांगरी रो साग,
रंगीलो म्हारो राजस्थान
बरसों सूं है हिवड़े हुं लाग।

2
मिसरी सी मीठी बोली,
प्रेम री पावन परिभाषा।
हर चार कोस के बाद
बदल जावे है अडे भाषा।

3
तपती धरती ढ़ळतो सूरज
हिवडे में है मरुगीत,
बाटां जोवे गोरी री नजरा
कद आवे म्हारे परदेसी प्रीत।

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4
आन, बान और शान रे साथ
जिम्मेदारी रो भार है पगड़ी,
सर पर सजे है जिसके भी,
लागे फेर बड़ी ही तगड़ी।

5
सावण रा सत्रह गया, तेरह भेल्या तीस
आया कोनी बालमा किणरी काढ़ी रीस
था बिन घड़ी नि आवडे, हियो हिलोला खाए
बिलखे थारी गोरड़ी, अन पाणी न भाय।

राजस्थानी भाषा को नहीं मिली मान्यता

समय की अजीब विडंबना ही है कि आज भी मायड़ भाषा को भारत सरकार द्वारा संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाई है। दुनिया भर में करोड़ों राजस्थानी अपनी मातृभाषा मायड़ भाषा के अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। आज से 20 बरस पहले 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव भी पास किया गया था जिसमें राजस्थानी मायड भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का आह्वान किया गया था। लेकिन कोई बात नहीं बनी।

मायड़ भाषा दिवस पर संकल्प ले

21 फरवरी को मायड़ भाषा दिवस के दिन हमारी हर राजस्थानी से गुजारिश है कि आज से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मायड़ भाषा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करे। अपने बच्चों को हिंदी अंग्रेजी खूब सिखाए लेकिन मायड़ भाषा से दूर न करे। मायड़ भाषा में बात करने से शर्म महसूस न करे बल्कि गर्व करे।

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