मदर्स – डे शून्य से शिखर तक
मां का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता
भगवान ने सिर्फ औरतों में ही वह शक्ति दी है जो एक नए जीवन को दुनिया में ला सकें। मां एक बच्चे को जन्म देती है और जीवन भर के लिए दोनों के दिल के तार जुड़ जाते हैं। मां साए की तरह उसके साथ रहती है। एक मां जो त्याग करती है उसका कर्ज बच्चों द्वारा कभी नहीं चुकाया जा सकता है। मां प्यार और त्याग की वो मूरत है जिसकी बराबरी शायद ही कोई कर सके।
1.मां एक व्यक्ति का नहीं अपितु राष्ट्र का निर्माण करती है
उमा गौतम
(डिस्ट्रिक एज्युकेशन ऑफिसर)
मां शब्द अपने आप में सम्पूर्ण ब्रम्हांण को समेटे हुए है। मां एक व्यक्ति का निर्माण नहीं करती अपितु एक राष्ट्र का निर्माण करती है। चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। टॉक- शॉ के दौरान उमा गौतम ने मां के रूप में अपनी जिंदगी के विभिन्न प्रकार से विचार व्यक्त किए। उन्होनें कहा कि मां तो मां होती है मां का कोई विकल्प नहीं होता।
स्नेह उसी ने भरा दीप में, फिर जलने की सीख दी
हर विपरीत हवा में उसने फिर चलने की सीख दी
2. मां की कोई तुलना हो ही नहीं सकती
मंजुला शर्मा
(बी.डी. मैमोरियल बीएड कॉलेज डॉयरेक्टर)
मां गरीब, अमीर चाहे कैसी भी क्यों न हो हर मां अपने बच्चों को बेइंतहां प्यार करती है। मां शब्द की तुलना किसी भी चीज से नहीं की जा सकती है। एक मां का अपने बच्चे के साथ जन्म से 9 महीने पूर्व से ही रिश्ता जुड़ जाता है। उसके बाद मां बच्चे को जन्म देती है और पालन-पोषण कर बड़ा करती है। एक मां ही है जो हर वक्त अपने बच्चे के साथ एक साए की तरह रहती है। ऐसे में बच्चे जब बड़े होकर मां के लिए समय नहीं दे पाते फिर भी मां का प्यार बच्चों के प्रति कतई कम नहीं होता है। इस दौरान उन्होनें कलयुगी बेटों के लिए मां की ममता के प्रति कई अविस्मरणीय उदाहरण पेश किए।
वह मां ही है जिसके रहते जिंदगी में कोई गम नहीं होता
दुनिया साथ दे या न दे पर मां का प्यार कभी कम नहीं होता
3. हां मेरा बचपन अभी जिंदा है क्यों कि में एक मां हूं
सीमा झालानी
(सीनियर टीचर सेन्ट एंसलम्स स्कूल, सोशल एक्टिविस्ट)
मां की अनुभूति ही अलग होती है। दादी, नानी, बहन, बेटी चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। मां एक अहसास, अनुभूति और एक अनमोल आनंद है। सीमा झालानी ने टॉक-शॉ के दौरान कहां कि वह स्कूल में शिक्षिका से ज्यादा मां के रूप में ही बच्चों को गाइड करती हैं। उन्होंने कहां कि बच्चा चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो गया है, मां के लिए वह हमेशा बच्चा ही रहता है। कोई भी मां बेटा या बेटी में फर्क नहीं करती है। रूपयों के पीछे भागदौड़ भरी जिंदगी में जब इंसान मार्ग भटक जाता है तब मां ही उसे सीने से लगाकर सही मार्ग प्रशस्त करती है। इस दौरान उन्होनें कहां कि कोई भी बेटा बड़ा होकर मां की इम्पोर्टेंस न भूले, क्यों की मां का कोई विकल्प ही नहीं होता। मां है तो सब कुछ है।
4. ब्राह्मण में सृष्टि की रचना मां के द्वारा की गई है
अर्चना सिंह
(टीचर सेन्ट एंसलम्स स्कूल, जज रैफरी)
मां तो मां होती है चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। मां ही है जो अपने बच्चों का स्नेह पूर्वक लालन-पालन करती है। अर्चना सिंह का कहना है कि मां ही बच्चों को संस्कार देती है और एक उचित राह दिखाती है। इस दौरान उन्होंने मां के लिए कई अविस्मरणीय उदाहरण पेश किए। मां साए की तरह अपने बच्चे के साथ रहती है और उसकी हर छोटी बड़ी जरूरतों को पूरा करती है।
मां दर्द सहती है कूद न कहती है आंखों में दर्द छिपाकर वह दुनिया से लड़ जाती है क्यों कि मां तो मां होती है
5. मां का कोई विकल्प नहीं, लेकिन मां हर चीज का विकल्प
डॉ. मनीषा माथुर
(ऐसोशिएट प्रोफेसर एण्ड हेड ऑफ डिपार्टमेन्ट पब्लिक एडमिस्ट्रेशन)
मां का कोई विकल्प नहीं, लेकिन मां हर चीज का विकल्प होती है। बच्चा हो या फिर बड़ा सभी को मां की जरूरत होती है। किसी का भी वजूद उसकी जननी की वजह से होता है। नारी ममता से भरी हुई है। एक मां ही होती है जो बच्चों के मन में दया का भाव जागृत करती है। एक मां ही समाज का निर्माण करती है। मां ही बच्चों में अच्छे संस्कार देती है। मां की कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता है। मां बच्चों के दिल की आवाज समझ सकती है।
6. जननी और जन्मभूमि सबसे बढ़कर होती है मां
सिंपल व्यास
(डायरेक्टर बचपन प्ले स्कूल)
मां को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। कोई भी जिंदगी भर मां की ममता का कर्ज उतार नहीं सकता। इस दुनिया में मां की तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है। मां से ज्यादा अनमोल इस पूरे जहां में कोई भी नहीं हो सकता। मां के समानान्तर हो सकते हैं, पर मां का रूप कोई भी नहीं ले सकता। जननी और जन्मभूमि सबसे बढ़कर होती है मां। मां ही होती है जो बच्चों के साथ डटकर स्ट्रगल करती है। मां के समान न ही कोई रक्षक है और न ही कोई छांया, ईश्वर के बाद मां ही उसका दूसरा रूप होती है।
7. भगवान के बाद कोई दूसरा है तो वह मां है
डॉ. रेनू जोशी
(एस. एस. जैन सुबोध पीजी कॉलेज, प्रिंसिपल)
बच्चों के भविष्य के लिए मां अपना कैरियर तक कुर्बान कर देती है। मां का बच्चे के पैदा होने से 9 महीने पहले से ही रिश्ता जुड़ जाता है। वह पेट में भी बच्चे को पूर्ण सुख का अहसास कराती है। एक मां अपने बच्चे की हर फीलिंग समझ सकती है। भगवान के बाद कोई दूसरा है तो वह मां है। अभिमन्यू ने मां के गर्व में ही चक्रव्यूह के बारे में जान लिया था, इसीलिए मां का बच्चे के साथ गर्भ से ही रिश्ता जुड़ जात है। किसी भी सफल इंसान के पीछे मां का ही हाथ होता है। मां अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर गुजरने की शक्ति रखती है। मां एक शेरनी की तरह अपने बच्चे के लिए किसी से भी लड़ जाती है।
8. मां सृष्टि पर भगवान की सबसे अच्छी रचना है
कविता सक्सेना
(फाउंडर डायरेक्टर पंख जागृति केन्द्र)
किसी के लिए भी मां का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता है। मां शब्द भगवान की सृष्टि पर सबसे अच्छी रचना है। कविता सक्सेना का कहना है कि वह कच्ची बस्तियों में जाती हैं, वहां जाकर वह उन बच्चों को शिक्षा के साथ मां का दुलार भी देती हैं। ऐसे में वह उनको ममता की नजरों से ही देखते हैं। उनका कहना है कि कोई भी बेटी हो या बेटा वह अपने बच्चों को ऋण जीवन भर नहीं चुका सकती है। मां प्यार का एक वह अहसास है जिसकी कोई सीमा नहीं है।
9. ममता मई और करूणा मई होती है मां
मैत्रेयी शुक्ला
(प्रिंसिपल रावत स्कूल)
मां ममता मई एवं करूणा मई होती है। मां का प्यार अनन्त है कोई भी मां अपने बच्चों के लिए हर हद तक जा सकती है। मां खुद के सुख-दुख न देखकर हमेशा अपने बच्चों के सुख के लिए प्रयत्नशील रहती है। एक मां ही होती है जो पूरे परिवार को अच्छी राह दिखाती है। इस ममता मई मां को प्रणाम।
लगती है जीवन का आम सा हिस्सा
पर उसकी मौजूदगी, जीवन को खास बनाती है
क्यों कि मां तो मां होती है
10. मां का दुलार, ममता और प्यार सब अमूल्य है
मिस संजू सचदेव
(फाउंडर द सेन्टा किड्स स्कूल)
मां जिसने जन्म दिया उसकी जगह कोई नहीं ले सकता, क्यों कि मां का रिश्ता बच्चे के साथ जन्म से भी पुराना होता है। उसका 9 महीने पहले से ही उसके साथ जुड़ाव हो जाता है। एक मां ही होती है जो अपने बच्चों के लिए हर हद तक स्ट्रगल करती है। मां हर क्षेत्र में अपने बच्चों के लिए एक अच्छा मैनेजमेंट सिखाती है। मिस संजू सचदेव कहती हैं कि माता-पिता से अच्छी राय कोई दे ही नहीं सकता। उन्होंने बेटों से अपील की है कि वह अपने पेरेन्टस को समय का तोहफा जरूर दें। ऐसे में उन्होंने कहां कि मां का कोई विकल्प हो ही नहीं सकता।
11. मां एक अहसास है जिसका कोई विकल्प नहीं है
रितिका राठौड़
(डायरेक्टर युनिवर्स स्कूल)
स्वर और व्यंजनों को कभी पारिभाषित नहीं किया जा सकता है, ऐसे ही मां एक फीलिंग है जिसका कोई विकल्प नहीं है। मां एक ममत्व का अहसास है। रितिका राठौड़ का कहना है कि वह एक शिक्षिका हैं जो हजारों बच्चों को शिक्षा दे चुकी हैं। उन्होंने परिवार के बीच में एक मां का होना अविस्मरणीय उदाहरण पेश किया। मां पूरे परिवार को बड़ी सूझ-बूझ से सवांरती है। एक औरत सास के रूप में, बहन के रूप में, बहु के रूप में, बेटी के रूप में और मां के रूप हर जगह अपना शत प्रतिशत देती है। मां की जगह कोई नहीं ले सकता। क्यों कि मां तो मां होती है।
India is known for handmade crafts. Our artisans make beautiful items with their hands, keeping…
In today’s time, everyone wants to do their own business. But the biggest problem is…
World Health Day : विश्व स्वास्थ्य दिवस हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाता है…
टोंक। विगत तीन वर्षों से अपने शैक्षणिक नवाचारों से चर्चित राहोली के पीएमश्री राजकीय उच्च…
जयपुर। हाल ही में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के द्वारा दिए गए विवादित…
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऋषि गालव भाग द्वारा 30 मार्च, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष पर…