कोटा। सफारी के दौरान प्रकृति एवं वन्यजीवों को देखने का अपना अलग ही मजा होता हैं। देश के टाइगर रिजर्व में अब कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। सफारी वाहनों में प्रशासन के द्वारा बदलाव किया जा रहा हैं। देश के टाइगर रिजर्व में अब जंगल सफारी का मजा दे रही जिप्सी गाड़ियों का सफर समाप्त होने जा रहा है। सफारी गाड़ी की जगह अब मारूति के वाहन लेने जा रहे हैं। जिम्नी अब लोगों को सफर करवाएगी। सफारी के वाहनों में बदलाव के लिए विभागीय अधिकारियों की और से कार्रवाई शुरू कर दी गई हैं।
नए बदलाव को लेकर वन विभाग की और से टेंडर प्रकिया भी शुरू कर दी गई है। जंगल की सफारी को पिछले 25 सालों से जिप्सी के द्वारा करवाया जाता था, लेकिन अब जिप्सी का सफर खत्म होने जा रहा हैँ। वन विभाग एक जिप्सी को जंगल में सफारी के लिए 10 साल तक काम में लेता था। इसके बाद में संचालक को नई जिप्सी लगाने के निर्देश दिए जाते थे।
देशभर की बात की जाए तो देश भर में लगभग 53 टाइगर रिजर्व है, इसमें से 45 टाईगर रिजर्व में सफारी चल रही है। प्रदेश के सवाईमाधोपुर, सरिस्का और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी चल रही है। यदि सवाईमाधोपुर टाइगर रिजर्व की बात की जाए तो सवाईमाधोपुर टाइगर रिजर्व में 269 जिप्सी रजिस्टर्ड है। एनटीसीए की ओर से देश के सभी टाइगर रिजर्व में चलने वाली जिप्सियों की संख्या वहां के फील्ड डायरेक्टर से मांगी गई है। रणथम्भौर टाईगर रिजर्व में चलने वाली 269 जिप्सियों की संख्या एनटीसीए को भेज दी गई है।
एनटीसीए की और से आगामी 18 अगस्त को बैठक आयोजित की जाएगी इससे पहले प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व से रिपोर्ट मांगी गई हैं। अधिकारीयों द्वारा लगातार मारुती सुजुकी कंपनी के अधिकारियों से वार्ता की जा रही हैं। वार्ता पूरी होने के बाद एनटीसीए को वाइल्ड लाइफ के हिसाब से गाड़ी तैयार करने के निर्देश देगा।
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