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Phalodi Satta Bazar में मुसलमान भी लगाते हैं सट्टा, चौंकाने वाला सच जान लें !

Phalodi Satta Bazar : वैसे तो इस्लाम में सट्टा खेलना मना है, लेकिन फलोदी के सट्टा बाजार (Phalodi Satta Bazar) में मुस्लिम भी सट्टा लगाते हैं। फलोदी राजस्थान में नए बने 17 जिलों में से एक जिला है। फलोदी में बड़े से लेकर बच्चे तक हर कोई माहिर सटोरिया हैं। फलोदी में सट्टा खेला नहीं जाता, बल्कि यहां किसी भी मुद्दे पर सटोरिये अनुमान के आधार पर उसका भविष्य बताते हैं। इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर Phalodi Satta Bazar की चर्चा बनी हुई है। हम आपको बताएंगे कि कैसे मुसलमान भी Phalodi Satta Bazar के दीवाने हो चुके हैं। हालांकि सट्टा खेलना गलत आदत है लेकिन चस्का लगने के बाद क्या अच्छा और क्या बुरा।

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फलोदी सट्टा बाजार में मुसलमान
(Phalodi Satta Bazar Muslim)

भले ही इस्लाम में सट्टा खेलना हराम है। लेकिन जोधपुर के आस पास के मुसलमान इन दिनों फलोदी के सट्टा बाजार में जमकर सट्टा लगा रहे हैं। खासकर पोकरण इलाके के मुस्लिम युवा Phalodi Satta Bazar में काफी एक्टिव हैं। रमजान के महीने में भले ही ये लोग कम सक्रिय नजर आ रहे थे, लेकिन ईद के बाद से ही फलोदी सट्टा बाजार में मुस्लिम सटोरियों (Phalodi Satta Bazar Muslim) की तादाद फिर से बढ़ती हुई नजर आने लगी है। ज्यादातर सटोरिये लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी (Phalodi Satta Bazar Lok Sabha 2024) की जीत पक्की बता रहे हैं।

इस्लाम में सट्टा खेलना कैसा है ? (Islam me Satta)

इस्लाम धर्म के अंदर जुआ खेलना (Islam me Satta) एक बहुत बड़ा गुनाह माना गया है। हुज़ूर ए अक्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया “जिसने जुआ खेला गोया उसने खिंज़ीर (सुवर) के गोश्त और ख़ून में हाथ धोया” चूंकि जुआ खेलना समय और पैसों की बेतहाशा बर्बादी है। सट्टेबाजी शरीयत के खिलाफ हे। सट्टे में पैसे हारने के बाद कई मुसलमान खुदकुशी भी कर लेते हैं। दीन की कमी की वजह से आज भी कई मुसलमान सट्टेबाजी की बुरी लत का शिकार हैं। हमें उनको सुधारने की कोशिश करनी चाहिए और अल्लाह से उनके लिए तौबा की दुआ करनी चाहिए।

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क्यों मना है मुस्लिम का सट्टा खेलना ?

इस्लाम में हर वो अमल मना है जिसके बाद इस्लान बदहवास और पागल सा हो जाता है। नशे की तरह ही जुआ खेलने वाले को नमाज का वक्त याद नहीं रहता है। लोग सट्टे (Islam me Satta) में मग्न होकर नमाज से बेखबर हो जाते हैं। साथ ही पैसा लगाने की वजह से आपस में लड़ाई झगड़ा भी करते हैं। कई लोग जुआ खेलकर दान कर देते है। जबकि हराम का पैसा जकात खैरात में भी देना मना है। लिहाज़ा जरा से लालच में अपनी दुनिया और आख़िरत बर्बाद मत करे और खुदा के लिए आज से ही सट्टे बाजी के दलदल से बाहर आ जाए।

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