Prahlad Kund Hindaun City Rajasthan: राजस्थान का इतिहास अपने-आप में काफी कुछ कहता है। राजस्थान में कई ऐसी जगह है, जिनके बारे में आपने खूब पढ़ा होगा और सुना भी होगा। लेकिन आज हम एक ऐसी जगह के बारे में आपको बता रहे है, जिसके बारे में अधिकतर लोगों को अंदाज भी नहीं हैं। जिस जगह के बारे में हम बात कर रहे है, उस जगह का इतिहास भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद की एक पौराणिक कथा से जुड़ा है।
हम बात कर रहे है अरावली और विंध्य पर्वत मालाओं से घिरे शहर ‘हिंडौन सिटी‘ के बारे में, जो राजस्थान के करौली जिले में स्तिथ है। कहा जाता है कि सदियों पहले यहां मत्स्य राजाओं का शासन हुआ करता था। जब आप हिंडौन घूमने आते है तो यहां की संकरी गलियों में पुराने मकानों की सरंचनाएं इस बात को प्रदर्शित करती है। शहर का नाम राक्षस राजा हिरण्यकश्यप के नाम पर रखा गया है, जिसे विष्णु भक्त प्रहलाद के पिता के रूप में जगत पहचानता है।
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पौराणिक कथा के अनुसार प्रह्लाद ने राक्षस कुल में जन्म लिया। उसके पिता राक्षसों के राजा हिरणकश्यप और माता किंवदंती थी। जन्म के समय से ही विष्णु भक्त मुनिवर नारद का सानिध्य मिल जाने की वजह से प्रहलाद भी विष्णु भक्ति में लीन हो गया था। लेकिन उसके पिता राक्षस राज हिरण्यकश्यप को विष्णु भक्ति रास नहीं आती थी, वह खुद को भगवान कहलाना पसंद करता था। इसलिए उसने अपने ही बेटे प्रहलाद को कई तरीकों से जान से मारना चाहा।
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जब उसके अत्याचार चरम पर पहुंच गए, तो भगवान विष्णु ने अपने घातक पंजों से राक्षस राजा को सजा देने का निश्चय किया। उसे मारने के लिए विष्णु ने नरसिम्हा (आधा मनुष्य और आधा शेर) का रूप धारण किया और उसे मिले आशीर्वाद का मान रखते हुए उसे संध्या (ना सुबह ना रात) के समय मुक्ति दी। कहते है ‘हिंडोन शहर’ में विष्णु भक्त प्रहलाद की स्मृति में एक छोटा सा तालाब उस समय तैयार किया गया था, जिसे ‘प्रहलाद कुंड’ पुकारा जाता है।
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