जयपुर। यह पहली दफा है, जब राजेंद्र राठौड़ को हार का मुंह देखना पड़ा। यह शिकस्त भी उनके हिस्से में तब आई है, जब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी के एकदम नजदीक थे। राजस्थान में भाजपा को बहुमत मिला है। लेकिन पार्टी के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ चुरू की तारानगर सीट से चुनाव हार गए। कांग्रेस के नरेंद्र बुडानिया ने राठौड़ को 10345 वोटों से चुनाव हराया लेकिन इस हार के पीछे बुडानिया ही नहीं,अपनी ही पार्टी की कद्दावर नेता का भी हाथ बताया।
राठौड़ लगातार 7 बार से विधायक थे। वे राजनीति में आने के बाद कभी भी चुनाव नहीं हारे। यह पहली दफा है। जब राजेंद्र राठौड़ को हार देखनी पड़ी है। हार के पीछे क्या रहा कारण और किस नेता के नाम का किया खुलासा तमाम चचाओं के साथ मॉर्निग न्यूज इंडिया के साथ खास बातचीत में राठौड़ ने राजनीति कॅरियर पर भी चर्चा की। राजनीति जोड़ तोड़ के माहिर 68 वर्षीय राठौड़ पार्टी के उतार चढ़ाव में साथ रहे है। राठौड़ वसुन्धरा राजे की दोनो सरकार में ताकतवर मंत्री रहे है। लेकिन केन्द्र में बीजेपी के अन्दर बदले शक्ति संतुलन को देखते हुए वे दिल्ली के करीबी हो गए थे। ऐसे में सीएम को लेकर उनकी दावेदारी भी काफी मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन स्थिति उलट हो गई।
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