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राजस्थान की बोलियों पे कविता, Rajasthan ki Boliyo pe Kavita RAS notes pdf

Rajasthan ki Boliyo pe Kavita : राजस्थान का नाम आते ही ज़ेहन में रंगों और वीरता की तस्वीर उतर आती है। लोक संस्कृति और सदियों पुरानी धरोहर लिए राजपूताना आज भी देश में अपनी एक अलग पहचान रखता है। ऊपर से अगर बात राजस्थानी भाषा मायड़ भाषा की हो तो कई लोग मारवाड़ी तो कई मेवाड़ी में बात करने लगते हैं। दरअसल राजस्थानी भाषा में कुल मिलाकर 73 अलग अलग बोलियां हैं जो हमें एक मजबूत सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत बनाती है। तो हमारे शायर (Rockshayar) ने राजस्थान की बोलियों एक शानदार कविता (Rajasthan ki Boliyo pe Kavita by Rockshayar) लिखी है जिसे आप सब पढ़ें और शेयर करें। राजस्थान जीके की तैयारी कर रहे प्रतियोगियों के लिए ये कविता ब्रह्मास्त्र हैखेल खेल में हम आपको राजस्थान के इतिहास और विरासत से इसी तरह रूबरू करवाते रहेंगे। क्योंकि हमारे शायर का कहना है कि “हो सभी की जीत, ऐसे खेल की तलाश में हूं, सौ दफ़ा गिरा फिर भी उम्मीदों के आकाश में हूं।”

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राजस्थान की बोलियों पे कविता (Rajasthan ki Boliyo pe Kavita by Rockshayar)

प्राचीन काल से कानों में, घोल रही रस मीठी बानी
11वी शताब्दी में जन्मी जो, भाषा है वो राजस्थानी।

जॉर्ज ग्रियर्सन ने सर्वप्रथम, राजस्थानी शब्द का प्रयोग किया
कुवलयमाला में जैन मुनि ने, मरूभाषा का उपयोग किया।

गुर्जर अपभ्रंश से पैदा हुई, दो हैं इसकी शैलियाँ
डिंगल और पिंगल कहलाई, वो साहित्यिक शैलियाँ

चारणों की शैली है डिंगल, जैसी लिखो वैसी बोली जाएं
और भाटों की शैली है पिंगल, काव्यरस सब इसमें समाएं।

राजस्थानी में कुल मिलाकर, तिहत्तर (73) हैं बोलियाँ
जिस जगह पनपा जो शब्द, वहीं का वो हो लिया।

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यूँ तो मानक बोली यहाँ की, कहलाती है मारवाड़ी
जोधपुर पाली पश्चिम की शान बढ़ाती है मारवाड़ी।

जयपुर क्षेत्र के आसपास में ढूँढ़ाड़ी है बोली जाती
संत दादू की रचनाएँ हमेशा, इसी में हैं बोली जाती।

उदयपुर के आसपास की, बोली को कहते मेवाड़ी
पाली जिले के दक्षिण में, बोली जाती है गोंडवाड़ी

कोटा बूँदी और झालावाड़ में, प्रचलित हाड़ौती है
सूर्यमल्ल की अधिकतर रचनाएँ, इसी में होती हैं।

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समस्त मालवा प्रांत की, बोली मालवी कहलाती
अलवर और भरतपुर में, मेवाती ही ब्रज बनाती।

डूंगरपुर और बाँसवाड़ा में, बोली जाती है वागड़ी
मारवाड़ी-मालवी का मिश्रण, कहलाती है रांगड़ी

हरियाणा मेवात बॉर्डर पर, बोली जाती है अहीरवाटी
चूरू सीकर झुँझुनूं जयपुर में, शेखावाटी व तोरावाटी।

आदिम काल से कानों में घोल रही रस मीठी बानी
अदा रॉयल भाव कोमल, लैंग्वेज है वो राजस्थानी।।

– इरफान अली (रॉकशायर)

कविराज का परिचय

पेशेवर लेखक यानी कंटेंट राइटर होने के साथ ही इरफान एक शायर (Urdu Hindi Poet) भी है, गुलाबी नगरी जयपुर में रहते हैं और M.Tech (Electronics and Communication) किया हुआ है। ज़िन्दगी की धूप में तपकर और 18 सालों का तजुर्बा हासिल करके इंजीनियरिंग लेक्चरर से लेकर बैंकर, फैक्ट्री मैनेजर और अब बतौर कंटेट राइटर इरफान अली अपने लाजवाब लफ़्ज़ों से लोगों को अपना बना रहे हैं। गरीब नवाज़ की नगरी अजमेर के बिजयनगर शहर के रहने वाले इरफान भाई खाड़ी देशों की ख़बरों (Middle East News) के एक्सपर्ट और इस्लामिक कंटेंट के माहिरीन माने जाते हैं। Rockshayar के नाम से हिंदी उर्दू शायरी लिखते हैं। इनके पिटारे में हर टॉपिक पर कविता और शायरी मौजूद रहती हैं। ये कविता जब इन्होंने आरएएस परीक्षा की तैयारी की थी उसी दौरान लिखी है। अब कवि को कोई भी टॉपिक दे दो तो उस पर कविता तो बनना तय है।

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