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Ganesh Chaturthi: भक्तों के काज संवारने वर्षों से खड़े हैं गणेश

जयपुर।  देशभर में Ganesh Chaturthi की धूम है। राजस्थान में भगवान गणेश के कई प्रसिद्व मंदिर है जहां की ख्याति देश विदेश तक देखने को मिलती है। गणेश चतुर्थी पर मॉर्निग न्यूज इंडिया डॉट कॉम भक्तों को राजस्थान के ऐसे ही प्रमुख गणेश मंदिरों के दर्शन करवा रहा है जिनकी मान्यताएं दूर दूर तक फैली है। राजस्थान के कोटा शहर में खड़े गणेश जी मंदिर अपनी विशेष पहचान रखता है। यह मंदिर इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि इस मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा खड़ी मुद्रा में स्थापित की गई है और इसी वजह से यहां हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। इस खड़े गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के दौरान एक बहुत बडे उत्सव के साथ जुलूस निकाला जाता है, जिस में अत्यधिक संख्या में भक्त देश विदेश से आते है। 

 

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यूं तो नए-पुराने कोटा शहर में गणेशजी के कई मंदिर हैं। पुराने कोटा क्षेत्र में मशांपूर्ण करने वाले गणेश, भूरिया गणेश विराजमान है,तो नए कोटा शहर में खड़े गणेशजी का प्राचीन मंदिर है। खड़े गणेश जैसे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने को ही खड़े हैं। कहते हैं, गणेश सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी ओम सिंंह बताते हैं कि मंदिर कितना प्राचीन है, मंदिर प्रतिमा की स्थापना किसने करवाई, कब करवाई यह नहीं कह सकते,लेकिन मंदिर में स्थापित प्रतिमा विशेष है। करीब चार दशक से मंंदिर में सेवा करने वाले ओमसिंह बताते हैं कि खड़े गणेशजी योगी रूप में विराजमान हैं। एक हाथों में कमंडल, दूसरे में माला व एक में परसा लिए हुए हैं। प्रतिमा के दर्शन करने मात्र से मन को शांति का अनुभव होता है। यह मंदिर लगभग 600 साल से भी अधिक साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर में भगवान् गणेश की एक बहुत ही आकर्षक मूर्ति है जो कि खड़ी हुई है। मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में भक्त गणेश जी के दर्शन करने के लिए आते हैं और भगवान् का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

 

तपोभूमि रहा है ये स्थान 

यह स्थान गुरु रतन सिंह की तपोभूमि रही है। खुद ओम सिंह ने भी तप किया है। वह बताते हैं कि पहले यहां छोटा सा मंदिर था। आसपास काफी जंगल था,लोग आने से कतराते थे। पगडडिंयों के सहारे लोग दर्शन करने आते थे। जैसे जैसे नया कोटा बसता गया,गणेशजी में लोगों की आस्था भी बढ़ती चली गई। मंदिर का विकास होता गया। आज शहर व अन्य शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने को आते हैं। मान्यता है कि जो भी सात बुधवार को कोई मनोकामना लेकर आता है,गणपति उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

 

बारह माह गूंजते हैं जयकारे

मंदिर में अब बारह माह जयकारे गूंजते हैं। बुधवार को मंदिर में दर्शनार्थियों की कतारें लगती है। रात तक मंदिर जयकारों से गूंजता है। गणेश चतुर्थी पर मेला भरता है। कोटा ही नहीं, दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। मनोकामना पूर्ण होने,विवाह व अन्य कई मांगलिक अवसरों कच्ची पक्की रसोईयां व गोठ यहां होती रहती है।

 

आस्था के साथ पर्यटन भी

क्षेत्र में मंदिर से कुछ दूरी पर रंगबाड़ी बालाजी मंदिर व बांके बिहारी व गणेश उद्यान के होने लोगो की चहलकदमी बनी रहती है,चारों तरफ हरियाली और खूबसूरती पर्यटको को यहां खींच  लाती है।

 

गणेश चतुर्थी पर सजेगा फूल बंगला 

कोटा के खड़े गणेश मंदिर दो दिवसीय भव्य मेला आयोजित किया जाएगा।सोमवार को शाम 7 बजे पूज्य संतों व धर्माचार्यों के सानिध्य में मेले का शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान परंपरागत रूप से पांच ध्वजा लेकर जुलूस रवाना होगा। बैंड के साथ धरणीधर सर्किल से खड़े गणेश मंदिर तक जयकारों के साथ जुलूस चलेगा। जहां ध्वजा मंदिर पर चढ़ाकर मेले का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद भव्य आतिशबाजी की जाएगी। उन्होंने बताया कि 19 सितम्बर को गणेश चतुर्थी पर मेला परिसर में शाम 7 बजे भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें राजस्थानी संस्कृति के कार्यक्रम होंगे। गणेश चतुर्थी पर भगवान खड़े गणेश का विशेष श्रृंगार होगा तथा फूल बंगला सजाया जाएगा। चतुर्थी को 18 सितंबर को आधी रात 12 बजे से गणेश जी का विशेष श्रृंगार शुरू होगा। सुबह सवा पांच बजे महाआरती होगी। इसके बाद श्रद्धालु दिनभर भगवान खड़े गणेश जी के दर्शन कर सकेंगे।

Suraksha Rajora

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