सपनों की उड़ान कैसे आसमान छूती है, यह जोधपुर के रहने वाले महेन्द्र ने अपने वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा कर साबित कर दिया है। बचपन में टूटे खिलौनों और सामनों से कुछ भी बनाने वाले इस युवा किसान के बेटे ने इसरो में वैज्ञानिक बनकर अपने पिता और गांव दोनों का नाम रोशन कर दिया।
जोधपुर के छोटे से गांव का है रहने वाला
जोधपुर जिले का यह युवा वहां के छोटे से गांव कालीजाल के छोगाराम नाम के किसान का बेटा है। महेन्द्र चैधरी नाम का यह युवा इसरो में वैज्ञानिक बना है। फिलहाल वे मैसूर के हिंदुस्तान पेट्रोलियम काॅर्पोरेशन लिमिटेड में काॅर्पोरेशन ऑफिसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शुरू से रहे हैं मेधावी
महेन्द्र की स्कूली शिक्षा गांव में ही पूरी हुई है। इसके बाद उन्होंने जेईई परीक्षा देकर एमएनआईटी जयपुर में प्रवेश लिया। इस दौरान ही गेट की परीक्षा भी पास कर ली। ऑल इंडिया लेवल पर इस परीक्षा में उन्हें 52वीं रैंक मिली थी। जिसके बाद उन्हें एचपीसीएल में ऑफिसर के पद पर काम मिला। फिर भी वे वैज्ञानिक बनने के सपने के पीछे चलते रहे।
जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो में वैज्ञानिक इंजीनियर मैकेनिकल की पोस्ट निकली तो उन्हें गेट के आधार पर चयनित किया गया। जहां साक्षात्कार के बाद उन्हें पूरे नंबर मिले। जैसे ही ऑल इंडिया लेवल पर उनके टाॅप करने का पता चला, उनके साथ ही उनके पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
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